CG Rivers Conservation : छत्तीसगढ़ में अरपा समेत 11 प्रमुख नदियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है। सरकार ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र देकर बताया कि इस पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग अब मुख्य सचिव विकास शील स्वयं कर रहे हैं।
सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि अगले 15 दिनों के भीतर नदियों के उद्गम स्थलों का सीमांकन कर वहां डिस्प्ले बोर्ड लगाया जाए। साथ ही उद्गम स्थलों के भू-अभिलेख और जियो-टैग्ड तस्वीरें भी शासन को भेजनी होंगी।
हालांकि, राज्य सरकार द्वारा बनाई गई इस कमेटी को लेकर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि समिति में सचिवों की जगह विशेषज्ञों को शामिल करने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
जनहित याचिकाओं के बाद बनी समिति
अरपा नदी के उद्गम और प्राकृतिक प्रवाह क्षेत्र के संरक्षण को लेकर अधिवक्ता अरविंद कुमार शुक्ला समेत अन्य ने वर्ष 2019 और 2020 में जनहित याचिकाएं दायर की थीं। बाद में इस मामले में प्रदेश की अन्य नदियों को भी शामिल किया गया।
हाईकोर्ट के 20 जनवरी के आदेश के पालन में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें वित्त, जल संसाधन और वन विभाग सहित सात विभागों के सचिवों को सदस्य बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने समिति में विशेषज्ञों की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने विभागों के सचिवों की जगह विषय विशेषज्ञों को शामिल करने पर विचार किया जाना चाहिए।
इन 11 नदियों के संरक्षण की योजना
राज्य सरकार ने बताया कि अरपा, महानदी, शिवनाथ, हसदेव, तांदुला, पैरी, मांड, केलो, सोन, तिपान और लीलगर नदियों के उद्गम स्थलों को संरक्षित और विकसित किया जाएगा।
इसके लिए विभाग स्तर पर विशेषज्ञों का एक समर्पित सेल बनाया जाएगा। नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक सर्वे कराकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार की जाएगी।
ट्रीटमेंट के बाद ही नदियों में जाएगा गंदा पानी
सरकार ने यह भी बताया कि शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के नदियों में नहीं छोड़ा जाएगा। उद्गम स्थलों को न केवल संरक्षित किया जाएगा बल्कि उन्हें आस्था और पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित करने की योजना है।
इस परियोजना के लिए विभागीय बजट के अलावा जिला खनिज निधि (DMF), मनरेगा और 15वें वित्त आयोग की राशि का भी उपयोग किया जा सकेगा।
8 सदस्यीय समिति का गठन
गठित समिति के अध्यक्ष मुख्य सचिव होंगे। इसके अलावा वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जल संसाधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, नगरीय प्रशासन एवं विकास और खनिज संसाधन विभाग के सचिव सदस्य होंगे।
छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के पूर्व कुलपति प्रो. एम.के. वर्मा को समिति में विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।





