रायपुर: छत्तीसगढ़ में छात्रसंघ चुनाव को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच राज्य सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने स्पष्ट कहा है कि फिलहाल छात्रसंघ चुनाव कराने को लेकर सरकार के स्तर पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है और इसकी संभावना भी नहीं है।
मंत्री ने बातचीत के दौरान संकेत दिए कि सरकार इस मुद्दे पर तत्काल कोई निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है। उनके इस बयान से साफ हो गया है कि छात्रों की मांग पर सरकार फिलहाल नरमी दिखाने के मूड में नहीं है।
दूसरी ओर, NSUI छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। संगठन के कार्यकर्ता पिछले कई दिनों से प्रदेशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल ही में कार्यकर्ताओं ने पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और आयुष विश्वविद्यालय का घेराव किया।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं सड़कों पर उतरे और नारेबाजी की। कुछ स्थानों पर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झूमाझटकी भी हुई, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। NSUI का कहना है कि छात्रसंघ चुनाव छात्रों की आवाज को मंच देने का माध्यम है और इसे लंबे समय तक बंद रखना छात्रहितों के खिलाफ है।
संगठन ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। इसके तहत प्रदेशव्यापी प्रदर्शन, विश्वविद्यालय बंद और बड़े स्तर पर आंदोलन की रणनीति बनाई जा रही है।
पृष्ठभूमि
राज्य में वर्ष 2014 से 2016 तक छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराए गए थे, जिसमें मतदान के जरिए पदाधिकारियों का चयन होता था। इसके बाद 2017 से यह निर्णय कुलपतियों पर छोड़ दिया गया और मनोनयन प्रणाली लागू कर दी गई।
फिलहाल, एक ओर सरकार का सख्त रुख है, तो दूसरी ओर NSUI का बढ़ता दबाव—ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमाने के आसार हैं।





