मुंगेली। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माणाधीन मकान पर तहसील प्रशासन द्वारा दूसरी बार स्टे आदेश जारी किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। ग्राम सेमरकोना निवासी देवेंद्र कश्यप ने कलेक्टर मुंगेली को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया है कि उनकी निजी भूमि पर बन रहे प्रधानमंत्री आवास को बिना स्पष्ट सीमांकन और चिन्हांकन के बार-बार रोका जा रहा है, जिससे उनका परिवार मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना कर रहा है।
देवेंद्र कश्यप के अनुसार ग्राम बेलसरी स्थित खसरा नंबर 143/3 की निजी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण कार्य चल रहा था। 29 जनवरी 2026 को तहसीलदार लोरमी ने निर्माण कार्य पर स्टे लगा दिया था, जिसके कारण करीब चार महीने तक निर्माण पूरी तरह बंद रहा। बाद में 4 जून को स्टे हटाया गया, लेकिन मात्र चार दिन बाद 8 जून को फिर नया स्टे आदेश जारी कर दिया गया।
10 जांच और 3 सीमांकन के बाद भी नहीं निकला समाधान
आवेदक का दावा है कि मामले में अब तक करीब 10 बार जांच दल मौके पर पहुंच चुका है और तीन बार भूमि का सीमांकन भी कराया जा चुका है। इसके बावजूद प्रशासन यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि उनकी निजी भूमि का वास्तविक क्षेत्र कौन-सा है और उसका मौके पर चिन्हांकन क्यों नहीं किया जा रहा।
देवेंद्र ने सवाल उठाया कि जब बार-बार जांच और सीमांकन हो चुके हैं, तब भी जमीन की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है तो इसका खामियाजा एक गरीब हितग्राही को क्यों भुगतना पड़ रहा है।
स्टे आदेश पर उठाए गंभीर सवाल
देवेंद्र कश्यप का कहना है कि प्रशासन यह दावा कर रहा है कि निर्माण का कुछ हिस्सा निजी भूमि और कुछ हिस्सा शासकीय भूमि पर स्थित है, लेकिन आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि विवादित हिस्सा कौन-सा है। उनका कहना है कि यदि केवल किसी हिस्से को लेकर विवाद है तो पूरे निर्माण कार्य पर रोक लगाना उचित नहीं है। पहले विवादित क्षेत्र का स्पष्ट चिन्हांकन होना चाहिए।
बरसात से बढ़ी चिंता, सामग्री हो रही खराब
आवेदक ने बताया कि बारिश का मौसम शुरू होने से आर्थिक नुकसान बढ़ रहा है। निर्माण सामग्री खराब होने लगी है और अब तक करीब 50 बोरी सीमेंट खराब हो चुकी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो मकान लंबे समय तक अधूरा रह सकता है, जिससे प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य भी प्रभावित होगा।
जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग
देवेंद्र कश्यप ने कलेक्टर से मांग की है कि तहसील स्तर के बजाय जिला स्तर पर सक्षम अधिकारियों की निष्पक्ष टीम गठित कर भूमि का पुनः सीमांकन और चिन्हांकन कराया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी 13 डिसमिल निजी भूमि का वास्तविक क्षेत्र मौके पर चिन्हित कर उन्हें कब्जा दिलाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि निष्पक्ष जांच में उनकी भूमि का कोई हिस्सा शासकीय भूमि में पाया जाता है तो वे स्वयं उस हिस्से पर किए गए निर्माण को हटाने के लिए तैयार हैं।
बेलसरी में निर्माण को बताया मजबूरी
आवेदन में उल्लेख किया गया है कि प्रधानमंत्री आवास उनकी पारिवारिक सदस्य विमला बाई के नाम से स्वीकृत हुआ है। इसका निर्माण ग्राम बेलसरी में पंचायत और आवास मित्र की जानकारी तथा सहमति से कराया जा रहा है। सेमरकोना और बेलसरी एक-दूसरे से सटे हुए गांव हैं तथा सेमरकोना में उपयुक्त भूमि उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी भूमि पर बेलसरी में निर्माण कराया गया।
देवेंद्र का कहना है कि उनकी मंशा किसी प्रकार का अतिक्रमण करने की नहीं थी। मकान निर्माण में केवल छत डालने का कार्य शेष है। यदि शुरुआत में ही आपत्ति दर्ज कराई जाती तो वे निर्माण कार्य शुरू ही नहीं करते।
‘आपत्ति है तो आवास निरस्त कर दीजिए’
देवेंद्र कश्यप ने आवेदन में कहा है कि यदि प्रशासन को बेलसरी में प्रधानमंत्री आवास निर्माण को लेकर कोई वैधानिक आपत्ति है तो विमला बाई के नाम से स्वीकृत आवास को निरस्त कर दिया जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि शासन से प्राप्त आवास की राशि वापस करने के लिए भी वे तैयार हैं, लेकिन उनकी निजी भूमि का सीमांकन और कब्जा उन्हें दिलाया जाए।
कलेक्टर से रखीं पांच प्रमुख मांगें
आवेदक ने कलेक्टर मुंगेली से 8 जून 2026 के स्टे आदेश की समीक्षा कर उसे हटाने, जिला स्तरीय टीम से पुनः सीमांकन कराने, कथित शासकीय भूमि के विवादित हिस्से को स्पष्ट करने, निजी भूमि पर निर्माण कार्य की अनुमति देने तथा लंबे समय से लंबित मामले का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है।
क्या बोले अपर कलेक्टर
इस मामले पर अपर कलेक्टर जी.एल. यादव ने कहा कि आवेदन प्राप्त हो गया है। आवेदनकर्ता की मांगों और शिकायतों पर नियमानुसार तथा न्यायोचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आश्वस्त किया कि जो भी विधिसम्मत कार्रवाई होगी, उसे प्राथमिकता के साथ किया जाएगा तथा निजी भूमि की पहचान और सीमांकन सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।





