खैरागढ़। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के हितग्राहियों को गैस सिलेंडर वितरण में कथित अनियमितता और फर्जी डिलीवरी दर्ज किए जाने के मामले में प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद साल्हेकला इंडियन ग्रामीण वितरक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
ग्रामीण उपभोक्ताओं ने शिकायत की थी कि गैस एजेंसी के कर्मचारी सिलेंडर की वास्तविक डिलीवरी से पहले ही उपभोक्ताओं से ओटीपी प्राप्त कर लेते थे। इसके बाद सिस्टम में सिलेंडर वितरित दिखा दिया जाता था, जबकि कई उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा था। रिकॉर्ड में डिलीवरी दर्ज होने के कारण लाभार्थियों के खातों में सब्सिडी की राशि भी पहुंच जाती थी।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने जांच कराई। जांच में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) प्रदाय एवं वितरण विनियमन आदेश-2000 के उल्लंघन के तथ्य सामने आए। इसके आधार पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। साथ ही मामले की जानकारी तेल उद्योग के राज्य स्तरीय समन्वयक को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों का आरोप था कि कई मामलों में उपभोक्ताओं के खातों में दो-दो और तीन-तीन बार सब्सिडी की राशि पहुंची, लेकिन संबंधित सिलेंडर कभी उनके घर तक नहीं पहुंचे। कुछ लोगों ने घरेलू गैस सिलेंडरों के कथित रूप से व्यावसायिक उपयोग में खपाए जाने की आशंका भी जताई थी।
चूंकि मामला प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों से जुड़ा है, इसलिए इसे गंभीर माना जा रहा है। योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराना है, ऐसे में वितरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता का सीधा असर ग्रामीण और गरीब हितग्राहियों पर पड़ता है।
फिलहाल प्रशासन मामले की आगे जांच कर रहा है। आने वाले दिनों में और तथ्यों के सामने आने तथा जिम्मेदार लोगों पर अतिरिक्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।





