July 27, 2026

तीजन बाई का ऐतिहासिक तंबूरा संग्रहालय को नहीं देगा परिवार, कौशल्या निवास में बनेगा स्मृति संग्रहालय

दुर्ग। पद्म विभूषण से सम्मानित दिवंगत पंडवानी गायिका तीजन बाई का ऐतिहासिक तंबूरा अब सरकारी संग्रहालय का हिस्सा नहीं बनेगा। उनके परिवार ने संस्कृति विभाग को यह धरोहर सौंपने से इनकार कर दिया है। परिवार का कहना है कि यह तंबूरा केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि तीजन बाई के संघर्ष, साधना और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमूल्य पहचान है, इसलिए इसे परिवार की विरासत के रूप में सुरक्षित रखा जाएगा।

हाल ही में संस्कृति विभाग की टीम गनियारी स्थित कौशल्या निवास पहुंची थी। विभाग ने तंबूरे को संग्रहालय में संरक्षित करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख ने स्पष्ट कर दिया कि परिवार इस ऐतिहासिक धरोहर को अपने पास ही सुरक्षित रखेगा। उन्होंने बताया कि तीजन बाई के पोते सूरज पंडवानी गायन की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए यह तंबूरा आने वाली पीढ़ियों के लिए परिवार की धरोहर बना रहेगा।

कौशल्या निवास में बनेगा स्मृति संग्रहालय

परिवार ने संस्कृति विभाग को सुझाव दिया है कि संग्रहालय के लिए तंबूरे का प्रतिरूप (डुप्लीकेट) तैयार कराया जा सकता है। वहीं, गनियारी स्थित कौशल्या निवास में एक छोटा स्मृति संग्रहालय विकसित किया जाएगा। यहां तीजन बाई की साड़ियां, पारंपरिक आभूषण, ऐतिहासिक तंबूरा और अन्य स्मृति चिह्न सुरक्षित रखे जाएंगे, ताकि लोग उनके जीवन, संघर्ष और लोककला में दिए गए योगदान को करीब से जान सकें।

5 जुलाई को हुआ था निधन

पंडवानी लोकगाथा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने वाली तीजन बाई का 5 जुलाई 2026 को रायपुर एम्स में निधन हो गया था। लोककला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्म विभूषण और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया था। उनकी कला और विरासत आज भी छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।