मुंबई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इन दिनों ऐसी वेब सीरीज दर्शकों की पहली पसंद बन रही हैं, जिनकी कहानियां आम जिंदगी और सामाजिक मुद्दों से जुड़ी हों। ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ और ‘ग्राम चिकित्सालय’ जैसी सफल सीरीज के बाद अब ‘आदर्श बाल विद्यालय’ (Adarsh Baal Vidyalaya) भी दर्शकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई यह सात एपिसोड की सीरीज सरकारी स्कूलों की वास्तविक चुनौतियों, शिक्षा व्यवस्था की खामियों और बच्चों की मासूम दुनिया को हास्य और व्यंग्य के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है।
सीरीज में के.के. मेनन, अर्चना पूरन सिंह, देवेन भोजानी, अभिमन्यु सिंह, नवीन कस्तूरिया और प्रसन्ना बिष्ट जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। मनोरंजन के साथ सामाजिक संदेश देने वाली यह सीरीज दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करती है।
सरकारी स्कूलों की चुनौतियों पर आधारित कहानी
निर्देशक हिमांग गौर के निर्देशन में बनी इस सीरीज की कहानी दिल्ली के काल्पनिक इलाके टिंकी टोली के सरकारी स्कूल ‘आदर्श बाल विद्यालय’ के इर्द-गिर्द घूमती है। स्कूल में पढ़ाई का स्तर कमजोर है, कई शिक्षक अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से नहीं लेते और स्कूल की व्यवस्था भी बदहाल दिखाई गई है। कई छात्र दसवीं बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन वे पांचवीं कक्षा के सामान्य प्रश्नों का उत्तर भी नहीं दे पाते। कहानी शिक्षा व्यवस्था की कई जमीनी समस्याओं को सरल और मनोरंजक अंदाज में सामने लाती है।
स्कूल बदलने की शुरू होती है कोशिश
कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब हेडमास्टर ज्ञानेश्वर त्रिपाठी को पता चलता है कि यदि उनका स्कूल दसवीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम के आधार पर दिल्ली-एनसीआर के शीर्ष 10 सरकारी स्कूलों में शामिल हो जाता है, तो उन्हें और उनकी पत्नी को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा।
इसके बाद वह स्कूल की व्यवस्था सुधारने, बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने और शिक्षकों में जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की कोशिश शुरू करते हैं। इस दौरान नए शिक्षक की एंट्री, छात्रों की शरारतें और शिक्षकों की मजेदार परिस्थितियां कहानी को और रोचक बना देती हैं।
लेखन और अभिनय है सबसे बड़ी ताकत
सीरीज की सबसे बड़ी खासियत इसका दमदार लेखन है। इसे बिस्वपति सरकार और समीर सक्सेना ने लिखा है। समीर सक्सेना इससे पहले ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’, ‘कोटा फैक्ट्री’ और ‘मामला लीगल है’ जैसी चर्चित सीरीज से जुड़ चुके हैं। यही अनुभव इस सीरीज की कहानी और संवादों में भी साफ दिखाई देता है।
अभिनय की बात करें तो के.के. मेनन ने हेडमास्टर के किरदार में प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। वहीं अर्चना पूरन सिंह, देवेन भोजानी, नवीन कस्तूरिया और अन्य कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी से निभाया है। कॉमेडी और भावनात्मक दृश्यों के बीच कलाकारों का संतुलन सीरीज को और मजबूत बनाता है।
देखें या नहीं?
अगर आपको ‘पंचायत’, ‘गुल्लक’ या ‘ग्राम चिकित्सालय’ जैसी सरल लेकिन प्रभावशाली कहानियां पसंद हैं, तो ‘आदर्श बाल विद्यालय’ आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए। यह सीरीज केवल सरकारी स्कूलों की कमियों को नहीं दिखाती, बल्कि यह संदेश भी देती है कि सही नेतृत्व, मेहनत और सामूहिक प्रयास से बदलाव संभव है। महज सात एपिसोड की यह वेब सीरीज मनोरंजन, हास्य और सामाजिक संदेश का बेहतरीन मिश्रण है, जो शुरुआत से अंत तक दर्शकों को बांधे रखती है।





