नई दिल्ली। फरवरी में पेश होने वाले आम बजट से पहले केंद्र सरकार ने 29 जनवरी 2026 को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश कर दिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट सत्र के दौरान लोकसभा में यह रिपोर्ट रखी।
इकोनॉमिक सर्वे में भारत की आर्थिक स्थिति, महंगाई, निवेश, वैश्विक जोखिम और विकास दर का विस्तृत लेखा-जोखा दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2027 में भारत की GDP ग्रोथ का अपर रेंज 7.2% और लोअर रेंज 6.8% रहने का अनुमान है।
सरकार के अनुसार, जीडीपी में तेजी का सबसे बड़ा कारण मजबूत घरेलू मांग (Domestic Demand) है।
🤖 पहली बार AI पर अलग चैप्टर
इस बार के आर्थिक सर्वे में पहली बार Artificial Intelligence (AI) को लेकर अलग चैप्टर शामिल किया गया है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में सरकार नई तकनीक और डिजिटल इकोनॉमी पर बड़ा फोकस करने वाली है।
सर्वे में कहा गया है कि AI से उत्पादकता, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
📈 वैश्विक अनिश्चितता के बीच मजबूत ग्रोथ
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था घरेलू मांग के दम पर आगे बढ़ रही है।
रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए करीब 7.4% ग्रोथ का उल्लेख किया गया है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार, राजकोषीय अनुशासन और सुधारों को प्रमुख आधार बताया गया है।
सरकार का मानना है कि वैश्विक हालात के असर को कम करने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती जरूरी है।
⭐ Economic Survey 2025-26 की बड़ी बातें
✔ कुल 16 चैप्टर शामिल
✔ पहली बार AI पर अलग अध्याय
✔ FY27 GDP ग्रोथ अनुमान: 6.8% से 7.2%
✔ घरेलू मांग से विकास को बल
✔ सोने-चांदी पर खास जिक्र
✔ FY26 में विकास दर 7% से अधिक
✔ राजकोषीय घाटा GDP का 4.8%
✔ CAD के कारण रुपये पर दबाव
✔ विनिर्माण निर्यात बढ़ाने पर जोर
✔ GST सुधारों का अगला चरण ई-वे बिल सिस्टम पर
✔ रुपये का मूल्यांकन अर्थव्यवस्था की सही तस्वीर नहीं दिखाता
✔ निजी निवेश में सुधार के संकेत
✔ वैश्विक जोखिम प्रबंधन जरूरी बताया गया
✔ अमेरिका से व्यापार वार्ता पूरी होने की उम्मीद
✔ विदेशी निवेशकों की निकासी पर चिंता
💱 रुपये और महंगाई पर क्या कहा गया?
सर्वे में कहा गया है कि करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) पर निर्भरता के कारण रुपये का मूल्य प्रभावित हुआ है। मुद्रा स्थिरता के लिए मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट बढ़ाना जरूरी है।
इसके साथ ही महंगाई के बेहतर आकलन के लिए CPI के आधार वर्ष में संशोधन की बात भी कही गई है।
📌 निजी निवेश और मांग में मजबूती
रिपोर्ट के अनुसार देश में मांग लचीली बनी हुई है और निजी निवेश के इरादों में सुधार दिखाई दे रहा है।
साथ ही यह भी कहा गया है कि वैश्विक परिस्थितियां फिलहाल भारत के लिए तत्काल मैक्रोइकोनॉमिक संकट पैदा नहीं कर रही हैं, लेकिन बाहरी अनिश्चितताओं पर नजर रखना जरूरी है।
❓ क्या होता है इकोनॉमिक सर्वे?
आर्थिक सर्वेक्षण एक सरकारी दस्तावेज होता है जिसे हर साल बजट से पहले संसद में पेश किया जाता है।
इसमें देश की आर्थिक स्थिति, विकास दर, महंगाई, रोजगार, व्यापार, निवेश और वित्तीय स्वास्थ्य का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। यह रिपोर्ट केंद्रीय वित्त मंत्रालय की टीम द्वारा तैयार की जाती है और बजट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाती है।





