रायपुर। फर्जी एनओसी के आधार पर बालाजी आयरन इस्पात कंपनी स्थापित किए जाने के आरोपों को लेकर अब प्रशासन हरकत में आ गया है। राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर को तत्काल जांच के निर्देश देने की बात कही है।
मंत्री टंकराम वर्मा ने कहा कि वे स्वयं इस मामले में कलेक्टर को निर्देशित करेंगे कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ क्षेत्र के विधायक ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के निवासी भी हैं और गांव के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।
उन्होंने बताया कि अल्दा गांव के लोगों से उनकी फोन पर बातचीत हुई थी और उन्हें चर्चा के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं आए। हड़ताल की जानकारी भी उन्हें पहले नहीं दी गई और इसकी जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि किसी भी कंपनी को एनओसी देने में मंत्री, सांसद या विधायक की कोई भूमिका नहीं होती। यह पूरी प्रक्रिया कंपनी और ग्राम पंचायत के बीच होती है, जहां आमसभा की सहमति के आधार पर एनओसी जारी किया जाता है।
उन्होंने कहा कि यदि ग्रामीणों का दावा है कि आमसभा में असहमति जताई गई थी, तो यह गंभीर विषय है और इसकी जांच जरूरी है कि बिना सहमति के एनओसी कैसे जारी हुआ। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ आरोप ऐसे लग रहे हैं जो किसी के बहकावे में आकर लगाए गए हैं।
मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “मंत्री बिक गए हैं, विधायक बिक गए हैं या जनप्रतिनिधि दलाल बन गए हैं” जैसे आरोप पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार हैं।
गौरतलब है कि इस मुद्दे को लेकर तिल्दा क्षेत्र के अल्दा गांव के सैकड़ों ग्रामीण एसडीएम और तहसीलदार कार्यालय का घेराव कर धरने पर बैठे हुए हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की ओर से जांच के निर्देश मिलने के बाद अब इस पूरे विवाद में आगे क्या सामने आता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।





