जगदलपुर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी चुनौतियां एक बार फिर सामने आई हैं। यहां शिक्षक अपनी जान जोखिम में डालकर रोजाना उफनती कोटरी नदी को नाव के सहारे पार कर स्कूल पहुंचते हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। बरसात के मौसम में यह सफर उनके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता।
कोयलीबेड़ा विकासखंड के कई स्कूल ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां बारिश के दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे में शिक्षकों को पहले नाव मिलने का इंतजार करना पड़ता है और फिर तेज बहाव वाली नदी पार कर कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। इसके बावजूद वे नियमित रूप से विद्यार्थियों को पढ़ाने का अपना दायित्व निभा रहे हैं।
उफनती कोटरी नदी में तेज बहाव, बड़े-बड़े पत्थर और अस्थिर जलधारा के बीच नाव से सफर करना बेहद जोखिम भरा है। शिक्षकों का कहना है कि हर दिन डर के साये में नदी पार करनी पड़ती है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसलिए वे हर हाल में स्कूल पहुंचने का प्रयास करते हैं।
शिक्षकों ने बताया कि क्षेत्र में इंटरनेट नेटवर्क की समस्या भी गंभीर है। कई बार नेटवर्क नहीं मिलने के कारण ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने और विभागीय कार्यों के निष्पादन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इससे प्रशासनिक कामकाज भी प्रभावित होता है।
शिक्षकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बरसात के दौरान नदी पार करने वाले शिक्षकों के लिए कम से कम लाइफ जैकेट, सुरक्षित नाव और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से बचा जा सके।
यह तस्वीर न केवल बस्तर अंचल की भौगोलिक चुनौतियों को उजागर करती है, बल्कि उन शिक्षकों के समर्पण को भी दर्शाती है, जो अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए हर दिन जोखिम भरा सफर तय कर रहे हैं।





