गरियाबंद जिले में पीडब्ल्यूडी के पुराने पुल से लोहे के पोल (दोम) चोरी करने की कोशिश का मामला सामने आया है। रात के अंधेरे में की जा रही इस वारदात को ग्रामीणों ने समय रहते पकड़ लिया, जिससे सरकारी संपत्ति चोरी होने से बच गई। हालांकि, घटना के दो दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई है।
रात में दो ट्रैक्टर लेकर पहुंचे थे चोर
जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय से लगभग 2 किलोमीटर दूर ग्राम सढोली और आमदी के बीच नाले पर स्थित पुराने पुल पर यह घटना हुई।
शनिवार रात करीब 10 बजे दो ट्रैक्टरों में फोकलेन मशीन की मदद से पुल पर लगे लोहे के दो पोल लोड किए जा रहे थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने संदिग्ध गतिविधि देख ली और मौके पर पहुंच गए।
ग्रामीणों की सतर्कता से रुकी चोरी
ग्रामीणों के पहुंचते ही वहां हड़कंप मच गया। ट्रैक्टर चालकों ने पोल को बृंदावन कृषि फार्म ले जाने की बात कही और दावा किया कि यह कार्य विभागीय अनुमति से किया जा रहा है।
लेकिन ग्रामीणों को इस पर शक तब हुआ जब काम रात में और बाहरी ट्रैक्टरों के उपयोग से किया जा रहा था।
सरकारी संपत्ति पर सवाल, ग्रामीणों का विरोध
ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह कार्य वैध होता तो दिन के समय और विभागीय निगरानी में किया जाता। साथ ही स्थानीय वाहनों की बजाय बाहरी जिले के ट्रैक्टरों का इस्तेमाल भी संदेह पैदा करता है।
ग्रामीणों के अनुसार, एक पोल की अनुमानित कीमत लगभग 10 हजार रुपये है और यह सरकारी संपत्ति है, जिसे बिना अनुमति हटाना गलत है।
पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन कार्रवाई अधूरी
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक ट्रैक्टर चालक पोल खाली कर मौके से फरार हो गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह मामला सरकारी संपत्ति की चोरी का प्रयास है और इसमें रसूखदार लोगों के नाम सामने आ रहे हैं।
लिखित शिकायत का इंतजार, पुलिस की स्थिति
गरियाबंद कोतवाली थाना प्रभारी ओपी यादव ने बताया कि अब तक इस मामले में लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। शिकायत मिलने पर जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रारंभिक तौर पर कोई स्पष्ट अपराध नजर नहीं आ रहा है।
PWD विभाग भी अनभिज्ञ
लोक निर्माण विभाग के ईई रामेश्वर ध्रुव ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं थी। मामले की जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए एसडीओ को निर्देशित किया जाएगा।
ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे कलेक्टर और एसपी से शिकायत करेंगे और आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
गरियाबंद की यह घटना सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों की जागरूकता से बड़ा नुकसान टल गया, लेकिन कार्रवाई में देरी से असंतोष बढ़ रहा है।





