September 6, 2026

Bastar News Update: बस्तर में उग रहा दुर्लभ विदेशी फल, गिद्धों की संख्या में इजाफा; पुलिस भर्ती के नाम पर ठगी का खुलासा

जगदलपुर। बस्तर में प्राकृतिक विरासत और जैव विविधता के साथ-साथ नई कृषि एवं पर्यावरणीय पहल भी तेजी से आकार ले रही हैं। जगदलपुर में मध्य अमेरिका की दुर्लभ फल प्रजाति गार्सिनिया इंटरमीडिया ने फल देकर बस्तर की जलवायु में विदेशी प्रजातियों की संभावनाओं को नई दिशा दी है। वहीं बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में संरक्षण प्रयासों के बाद गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद जगी है। दूसरी ओर कोंडागांव में पुलिस भर्ती के नाम पर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है।

बस्तर की मिट्टी में उगा मध्य अमेरिका का दुर्लभ फल

जगदलपुर। बस्तर की पहचान अब केवल जंगल, झरनों और पारंपरिक जैव विविधता तक सीमित नहीं है। यहां की मिट्टी में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पाई जाने वाली दुर्लभ फलदार प्रजातियों को भी आजमाया जा रहा है।

ट्री-मैन सम्पत झा के उद्यान में मध्य अमेरिका की दुर्लभ प्रजाति गार्सिनिया इंटरमीडिया ने फल दिया है। यह प्रजाति मेक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पनामा और कोलंबिया जैसे देशों में पाई जाती है।

खास बात यह है कि पौधे ने बस्तर की जलवायु और मिट्टी के साथ खुद को अनुकूल साबित किया है। सम्पत झा इससे पहले विश्व प्रसिद्ध मियाजाकी आम का भी बस्तर में सफल प्रयोग कर चुके हैं।

इन प्रयोगों से बस्तर में विदेशी और दुर्लभ फलदार प्रजातियों की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि स्थानीय और देशी फल प्रजातियों के संरक्षण पर भी समान रूप से जोर दिया जा रहा है। उद्देश्य बस्तर की हरियाली और जैव विविधता को और समृद्ध करना है।

इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बढ़ी गिद्धों की संख्या

बीजापुर। कभी बस्तर के आसमान से लगभग गायब होते नजर आ रहे गिद्ध अब संरक्षण प्रयासों के बाद दोबारा नजर आने लगे हैं। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में वर्ष 2020 में गिद्धों की संख्या महज चार रह गई थी, जबकि अब इनकी संख्या सैकड़ों तक पहुंचने की बात सामने आई है।

गिद्धों को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने के लिए यहां वल्चर कैफे यानी सुरक्षित भोजन स्थल बनाया गया है। पशु चिकित्सा जांच के बाद विषमुक्त मवेशियों के शव यहां गिद्धों के लिए रखे जाते हैं।

गिद्धों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग जैसी आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। दो गिद्धों की ट्रैकिंग से हजारों डेटा पॉइंट हासिल हुए हैं। करीब 10 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में गिद्धों की आवाजाही से इनके संरक्षण के दायरे को समझने में मदद मिली है।

पंचायतों की भागीदारी से करीब 100 किलोमीटर क्षेत्र में गिद्ध सुरक्षित क्षेत्र बनाने की पहल भी की गई है। बस्तर में गिद्धों का संबंध पर्यावरण के साथ-साथ जटायु की पौराणिक कथा से भी जुड़ा है।

बेलमेटल में पत्थर का प्रयोग, कोंडागांव की घड़वा कला को मिला नया रूप

कोंडागांव। कोंडागांव की पारंपरिक घड़वा कला में शिल्पकार अब नए प्रयोग कर रहे हैं। खुटपारा, सोनाबाल और मर्दापाल क्षेत्र के कलाकार पारंपरिक बेलमेटल के साथ पत्थर का संयोजन कर नई कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं।

इन कलाकृतियों में प्रकृति, जनजातीय संस्कृति और स्थानीय जीवन से जुड़े स्वरूपों को नए अंदाज में प्रस्तुत किया जा रहा है। धातु की बारीक कारीगरी और पत्थर की मजबूती का मेल इन शिल्पों को अलग पहचान दे रहा है।

शिल्पकारों का यह प्रयोग बताता है कि पारंपरिक कला को संरक्षित रखने के साथ आधुनिक जरूरतों के मुताबिक उसमें बदलाव भी किया जा सकता है। डिजाइन, आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और बेहतर बाजार से जोड़कर कोंडागांव की हस्तशिल्प कला को पर्यटन और रोजगार का बड़ा माध्यम बनाया जा सकता है।

पुलिस की नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी, दो आरोपी गिरफ्तार

कोंडागांव। पुलिस विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। फरसगांव और कोंडागांव पुलिस की कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

आरोप है कि गिरोह ने करीब 15 युवाओं को बस्तर फाइटर और जिला पुलिस बल में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। इसके बदले करीब 25 से 30 लाख रुपये की रकम वसूले जाने की शिकायत सामने आई है।

आरोपी खुद को पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क वाला बताकर युवाओं को भरोसे में लेते थे। नौकरी के नाम पर उनसे पैसे के अलावा आधार कार्ड, अंकसूची और अन्य प्रमाण पत्र भी लिए जाते थे।

पुलिस ने मामले की जांच के दौरान करीब तीन महीने तक बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन का विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पहले मुख्य आरोपी को बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसके साथी को फरसगांव क्षेत्र से पकड़ा गया।

पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, डायरी, रजिस्टर और पीड़ितों के दस्तावेजों से संबंधित फाइलें जब्त की हैं। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने और कितने युवाओं को अपना शिकार बनाया है।

इंद्रावती नदी पर बन रहा पुल, दर्जनों गांवों को मिलेगी कनेक्टिविटी

जगदलपुर। लोहण्डीगुड़ा की बिंता घाटी के नीचे बसे गांवों के लिए इंद्रावती नदी पर बन रहा पुल बेहतर कनेक्टिविटी की उम्मीद लेकर आया है। सतलपुर से कांटाबांस के बीच करीब 25 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण किया जा रहा है। पुल तक पहुंचने वाली पक्की सड़क का काम भी शुरू हो चुका है।

इंद्रावती के दूसरे छोर पर स्थित कांटाबांस, चंदेला, धर्माबड़ा, अमलीधार और कोड़ेनार जैसे गांवों के लोगों को बारिश के मौसम में आवाजाही में काफी परेशानी होती है। नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन गांवों का मुख्यालय से संपर्क प्रभावित होने का खतरा बना रहता है।

पुल बनने के बाद ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और सरकारी योजनाओं तक पहुंच में आसानी होने की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही मांग अब जमीन पर दिखाई दे रही है, हालांकि निर्माण की धीमी रफ्तार को लेकर चिंता बनी हुई है।

इसी बीच बोधघाट परियोजना को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि भविष्य में जलभराव की स्थिति बनने पर पुल पर इसका क्या असर होगा। ऐसे में पुल निर्माण और प्रस्तावित परियोजना के बीच तकनीकी एवं प्रशासनिक समन्वय को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।