बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महिला सम्मान और सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी की 10 साल की सजा को बरकरार रखते हुए कहा है कि दुष्कर्म जैसी घटना किसी महिला की गरिमा और आत्मसम्मान को गहरी चोट पहुंचाती है। ऐसी मानसिक पीड़ा और सामाजिक ग्लानि आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए पर्याप्त हो सकती है।
जस्टिस एनके व्यास की एकलपीठ ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के कसडोल थाना क्षेत्र के मामले में आरोपी विजय कुमार वर्मा की आपराधिक अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई 10 वर्ष की सजा को यथावत रखा।
घर में घुसकर किया था दुष्कर्म
मामला 22 अगस्त 2004 का है। पीड़िता घर में अकेली थी, जबकि उसके भाई और भाभी खेत में काम करने गए थे। इसी दौरान आरोपी विजय कुमार वर्मा घर में घुसा और जबरन दुष्कर्म किया। घटना के दौरान भाई के लौटने पर आरोपी भागने की कोशिश कर रहा था, जिसे पकड़ लिया गया।
लोक-लाज से आहत होकर लगाई थी आग
घटना से आहत पीड़िता ने घर में रखा मिट्टी तेल अपने ऊपर डालकर आत्मदाह कर लिया। गंभीर रूप से झुलसने के बाद उसने अपनी भाभी को आरोपी की करतूत बताई थी। अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई।
प्रेम प्रसंग की दलील खारिज
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने प्रेम प्रसंग की दलील दी, लेकिन हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि घटनास्थल से मिले फटे कपड़े इस बात का प्रमाण हैं कि पीड़िता ने विरोध किया और खुद को बचाने का प्रयास किया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी का कृत्य ही पीड़िता की आत्महत्या का प्रत्यक्ष कारण था। ऐसे जघन्य अपराधों में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने आरोपी की जमानत तत्काल प्रभाव से निरस्त करते हुए दो माह के भीतर ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।





