बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई, जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों और सोशल मीडिया पर यह कहा जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इशारे पर सैन्य ऑपरेशन के जरिए मादुरो को उनके आवास से हिरासत में लिया गया।
इन दावों के अनुसार, कथित तौर पर निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उनके खिलाफ ड्रग्स से जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अब तक अमेरिका या वेनेजुएला सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
▶ चीन की तीखी प्रतिक्रिया, UN में जताई आपत्ति
मादुरो से जुड़े इन दावों के बाद वेनेजुएला के प्रमुख ट्रेड पार्टनर चीन की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।
चीन के एक शीर्ष राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका के इस कथित कदम पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
चीन का कहना है कि
“किसी संप्रभु देश के राष्ट्रपति के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन मानी जाएगी।”
▶ वेनेजुएला में चीन की बड़ी हिस्सेदारी
विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की नाराजगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि
- वेनेजुएला में चीन एक बड़ा निवेशक और रणनीतिक साझेदार है
- तेल, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र में चीन की भारी हिस्सेदारी है
ऐसे में मादुरो को लेकर किसी भी प्रकार की अमेरिकी कार्रवाई या हस्तक्षेप पर चीन की प्रतिक्रिया स्वाभाविक मानी जा रही है।
▶ अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ा तनाव
इस पूरे घटनाक्रम ने
- अमेरिका–चीन संबंधों,
- लैटिन अमेरिका की स्थिरता,
- और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका
पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह वैश्विक कूटनीति में बड़ा टकराव पैदा कर सकता है।





