रायपुर। राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP) के तहत कुष्ठ रोग के संक्रमण को पूरी तरह समाप्त करने और “जीरो ट्रांसमिशन” के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए नया रायपुर में दो दिवसीय क्षेत्रीय समीक्षा एवं रणनीतिक कार्ययोजना कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा, झारखंड और मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विशेषज्ञ और कार्यक्रम प्रबंधक शामिल हुए।
कार्यशाला में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन संचालक आराधना पटनायक, स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन संचालक संजीव कुमार झा, संयुक्त सचिव निखिल गजराज तथा कुष्ठ रोग प्रकोष्ठ के उप महानिदेशक डॉ. सुनील वी. गिट्टे मौजूद रहे।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कहा कि कुष्ठ रोग केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं है, बल्कि इससे जुड़ा सामाजिक कलंक भी रोगियों के जीवन को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ “कुष्ठ मुक्त छत्तीसगढ़” के लक्ष्य को लेकर गंभीर और प्रतिबद्ध है तथा इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव आराधना पटनायक ने कहा कि कुष्ठ रोग के शून्य संक्रमण लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्यों के बीच बेहतर समन्वय, अनुभवों का आदान-प्रदान और साक्ष्य आधारित योजना निर्माण बेहद जरूरी है। उन्होंने प्रभावित समुदायों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और रोगियों के प्रति भेदभाव खत्म करने के लिए जनजागरूकता पर जोर दिया।
कार्यशाला में पांचों राज्यों ने अपने-अपने क्षेत्रों में कुष्ठ रोग नियंत्रण की स्थिति, नए मामलों की पहचान, उपचार सेवाओं, विकलांगता रोकथाम और पुनर्वास कार्यों की जानकारी साझा की। साथ ही विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए नवाचार और सफल मॉडल भी प्रस्तुत किए गए।
उप महानिदेशक डॉ. सुनील वी. गिट्टे ने बताया कि वर्ष 2025-26 में देशभर में 91,783 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान हुई है। वर्तमान में कुष्ठ रोग की प्रचलन दर 0.56 प्रति 10 हजार आबादी दर्ज की गई है। नए मामलों में 2.12 प्रतिशत रोगियों में ग्रेड-2 विकलांगता और 4.18 प्रतिशत मामले बच्चों में पाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि पुनर्वास और विकलांगता रोकथाम के लिए देशभर में 1,591 पुनर्निर्माण सर्जरी की गई हैं। इसके अलावा 1.03 लाख से अधिक एमसीआर फुटवियर और 1.25 लाख से ज्यादा सेल्फ-केयर किट वितरित की गई हैं।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने रोग की शीघ्र पहचान, समय पर उपचार, सामुदायिक सहभागिता और सामाजिक व्यवहार में बदलाव को कुष्ठ उन्मूलन की सफलता की कुंजी बताया। प्रतिभागियों ने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों से देश को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की जा सकेगी।





