खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में लमती नदी पर प्रस्तावित डेम परियोजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम लछना, बोरला, महुआढार और कटेमा के सैकड़ों ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की सबसे बड़ी वजह यह है कि जिस जमीन को डुबान क्षेत्र बताया जा रहा है, उसी जगह पर सरकार द्वारा विकास कार्य भी कराए जा रहे हैं। पंचायत के माध्यम से सीसी रोड का निर्माण जारी है और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई मकान भी बनाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में भ्रम और नाराजगी दोनों बढ़ गई है।
ग्रामीणों की चिंता और आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि लमती नदी उनके जीवन का आधार है। इसी पर खेती, रोजगार और रोजमर्रा का आवागमन निर्भर है। प्रस्तावित डेम बनने से लछनाटोला सहित कई बस्तियां पूरी तरह डुबान में आ जाएंगी, जिससे हजारों लोगों की आजीविका और सामाजिक ढांचा प्रभावित होगा।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले बनाए गए प्रधानपाट बैराज पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन वह पिछले 10–12 वर्षों से बेकार पड़ा है। अब उसी विफलता को छिपाने के लिए नई परियोजना लाई जा रही है, जिसमें फिर से ग्रामीणों को विस्थापित किया जाएगा।
मुख्य मांगें
ग्रामीणों ने मांग की है कि डुबान क्षेत्र से जुड़े सभी दस्तावेज, नक्शा-खसरा और एनओसी सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही बिना ग्रामसभा की सहमति किसी भी निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
सरपंच का बयान
ग्राम सरपंच कमलेश वर्मा ने कहा कि गांव में अजीब स्थिति बन गई है—एक ओर विकास कार्य चल रहे हैं, तो दूसरी ओर उसी जमीन से उजड़ने का डर सता रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि नए डेम के बजाय पुराने बैराज को ही दुरुस्त किया जाए।
इस पूरे मामले में पर्यावरणीय असर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है, क्योंकि डेम निर्माण से जंगल और वन्यजीव प्रभावित हो सकते हैं।







