May 15, 2026

कोंडागांव में अवैध लकड़ी तस्करी का खुलासा, SDO के आदेश पर पकड़ी गाड़ियां छोड़ी गईं

कोंडागांव। छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में अवैध लकड़ी कटाई और तस्करी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बोरगांव क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने मुखबिर की सूचना पर लकड़ी से लदी दो गाड़ियों को पकड़ा, लेकिन बाद में उपवनमंडल अधिकारी (SDO) के निर्देश पर बिना ठोस जांच के उन्हें छोड़ दिया गया। इस घटना के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के मुताबिक, पकड़ी गई दोनों गाड़ियां (CG-07 CH 6304 और CG-07 CJ 3729) में प्रतिबंधित आम और सेमल की लकड़ियां भरी हुई थीं। टीम जब जांच कर रही थी, तभी SDO ने मौके पर मौजूद कर्मचारियों को निर्देश दिया कि गाड़ियों के कागजात सही हैं और उन्हें तुरंत छोड़ दिया जाए।

बिना जांच छोड़ी गई गाड़ियां, उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना भौतिक सत्यापन और ट्रांजिट पास (TP) की जांच के सिर्फ एक आदेश के आधार पर लकड़ी को वैध कैसे घोषित किया गया। नियमों के अनुसार, आम और सेमल जैसे पेड़ों की कटाई और परिवहन के लिए अनुमति और ट्रांजिट पास अनिवार्य होता है।

अंतर्राज्यीय तस्करी की आशंका

पकड़ी गई गाड़ियों के नंबर दुर्ग-भिलाई (CG-07) के हैं, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि मामला किसी बड़े अंतर्राज्यीय या अंतर्जिलीय तस्करी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यदि लकड़ी का परिवहन वैध होता, तो बाहर से गाड़ियां यहां क्यों आतीं।

कैमरे से बचते दिखे अधिकारी

मामले पर जब मीडिया ने SDO से सवाल पूछे, तो उन्होंने कैमरे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। हालांकि, उपलब्ध वीडियो में अधिकारी यह कहते नजर आ रहे हैं कि पंचायत स्तर पर आम और सेमल की लकड़ी बिना अनुमति काटी और परिवहन की जा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दावा नियमों के विपरीत है।

क्या कहता है कानून?

  • आम (फलदार) और सेमल (इमारती लकड़ी) की कटाई के लिए राजस्व विभाग से अनुमति जरूरी
  • परिवहन के लिए वन विभाग का ट्रांजिट पास (TP) अनिवार्य
  • केवल नीलगिरी, बबूल और सूबबूल जैसी प्रजातियों को सीमित छूट

जांच की मांग और बढ़ते सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने वन विभाग की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या नियमों की अनदेखी कर तस्करी को संरक्षण दिया जा रहा है? क्या उच्च अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे?

स्थानीय लोगों और जानकारों की मांग है कि इस ‘संदिग्ध’ आदेश की निष्पक्ष जांच हो, ताकि जिले के जंगलों को अवैध कटाई से बचाया जा सके।