बालोद/रायपुर। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में संपन्न हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। कांग्रेस ने योजना में वितरित किए गए मंगलसूत्रों को लेकर घोटाले का आरोप लगाया है, जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए योजना के नियमों के अनुरूप सामग्री वितरण का दावा किया है।
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष एवं संजारी-बालोद विधायक संगीता सिन्हा ने मामले को महिलाओं के सम्मान से जुड़ा बताते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कांग्रेस ने उठाए गुणवत्ता पर सवाल
संगीता सिन्हा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत नवविवाहिताओं को दिए गए मंगलसूत्रों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मंगलसूत्र के लॉकेट में चांदी होने की बात कही गई, लेकिन हितग्राहियों का दावा है कि चेन गिलेट धातु की है।
उन्होंने कहा कि जिन आभूषणों को सोना-चांदी के रूप में प्रस्तुत किया गया, उनकी जांच में केवल चांदी की परत होने की बात सामने आई है। कांग्रेस का आरोप है कि योजना के नाम पर गुणवत्ता से समझौता किया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
नवविवाहिताओं ने जताई नाराजगी
मामले को लेकर कुछ नवविवाहिताओं ने भी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि उन्हें विवाह समारोह के दौरान जो आभूषण दिए गए, उनके बारे में बताया गया था कि वे सोना-चांदी के हैं, लेकिन बाद में जांच कराने पर उनकी गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा हुआ।
हितग्राहियों ने मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यह केवल आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि उनके सम्मान और विश्वास से भी जुड़ा मामला है।
विभाग ने आरोपों को बताया भ्रामक
महिला एवं बाल विकास विभाग ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत सभी व्यवस्थाएं शासन द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों और वित्तीय प्रावधानों के अनुसार की गईं।
विभाग के अनुसार 10 फरवरी 2026 को खड़गवां विकासखंड के चनवारीडांड में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कुल 184 जोड़ों का विवाह संपन्न कराया गया था। योजना के तहत प्रति कन्या 50 हजार रुपये की सहायता राशि निर्धारित है, जिसमें 35 हजार रुपये सीधे हितग्राही के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से जमा किए जाते हैं।
बढ़ी कीमतों के कारण दिए गए कृत्रिम मंगलसूत्र
विभागीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शेष राशि विवाह आयोजन, भोजन, आवास, वस्त्र, श्रृंगार सामग्री तथा अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च की जाती है। अधिकारियों के मुताबिक चांदी की बढ़ती कीमतों और निर्धारित वित्तीय सीमा को देखते हुए शासन के प्रावधानों के अनुरूप कृत्रिम मंगलसूत्र वितरित किए गए थे।
विभाग ने यह भी बताया कि सामग्री की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर संबंधित आपूर्तिकर्ता फर्म पर प्रति हितग्राही 100 रुपये की दर से कुल 18,400 रुपये की कटौती की गई। साथ ही प्रति कन्या 1,000 रुपये सीधे बैंक खातों में अंतरित किए गए।
जांच की मांग और बढ़ा विवाद
कांग्रेस ने पूरे मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए खरीद प्रक्रिया और सामग्री आपूर्ति की जांच कराने की मांग की है। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि योजना का संचालन पूरी पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया है।
अब इस मामले में जांच अथवा आगे की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद ही विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





