Mungeli। जिले में प्रस्तावित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। नगर पंचायत जरहागांव और ग्राम पंचायत छतौना के बीच यह मुद्दा अब स्थानीय स्तर से निकलकर राजनीतिक चर्चा का विषय बन चुका है। जहां एक ओर इसे विकास से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थल चयन को लेकर लोगों में असहमति लगातार बढ़ती जा रही है।
दरअसल, जिला पंचायत की सामान्य सभा में ग्राम छतौना की गौठान भूमि पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण का प्रस्ताव पारित किया गया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने कलेक्टर को भूमि आवंटन के लिए अनुशंसा भेजी और राजस्व विभाग द्वारा जांच प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। लेकिन जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक हुआ, नगर पंचायत जरहागांव के नागरिकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।
छतौना का पक्ष: बेहतर लोकेशन और भविष्य की संभावनाएं

छतौना के ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित भूमि मुख्य मार्ग से जुड़ी हुई है और यहां से आसपास के गांवों तक पहुंच आसान है। उनका तर्क है कि क्षेत्र में पहले से थाना, सेवा सहकारी समिति और धान खरीदी केंद्र संचालित हैं, जिससे यह इलाका एक उभरता हुआ प्रशासनिक केंद्र बन चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार, जरहागांव और छतौना के बीच दूरी बहुत कम है और केवल एक पुल का फासला है। ऐसे में अस्पताल यहां बनने से न सिर्फ वर्तमान जरूरतें पूरी होंगी, बल्कि भविष्य में विस्तार की भी पर्याप्त संभावना रहेगी।
जरहागांव का पक्ष: मौजूदा सुविधा और निरंतरता
दूसरी ओर, जरहागांव के लोगों का कहना है कि वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यहीं संचालित हो रहा है, इसलिए नया CHC भी यहीं बनाया जाना चाहिए। उनका मानना है कि नगर क्षेत्र में पहले से सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे मरीजों और स्टाफ को ज्यादा सहूलियत मिलेगी।
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि अस्पताल को स्थानांतरित करने से लोगों को नई व्यवस्था के अनुकूल होने में परेशानी होगी और सेवाओं की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
राजनीतिक रंग और ज्ञापन सौंपे गए
इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप भी ले लिया है। कांग्रेस नेताओं ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्थल चयन पर पुनर्विचार की मांग की है। वहीं दूसरी ओर, भाजपा से जुड़े जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर खुलकर बयान देने से बचते नजर आ रहे हैं, हालांकि स्थानीय स्तर पर उनकी सक्रियता बनी हुई है।
कमीशनखोरी की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल
विवाद के बीच एक और पहलू चर्चा में है, वह है संभावित कमीशनखोरी। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी को लेकर अंदरखाने खींचतान चल रही हो सकती है।
हालांकि, इन आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें केवल जनचर्चा के रूप में ही देखा जा रहा है। बावजूद इसके, इस तरह की चर्चाओं ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
निर्णय के लिए अहम सवाल
इस विवाद के बीच कुछ महत्वपूर्ण सवाल सामने हैं—
- किस स्थान से अधिक गांवों की पहुंच आसान होगी?
- आपातकालीन स्थिति में किस जगह से त्वरित चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी?
- भविष्य में विस्तार के लिए पर्याप्त भूमि कहां उपलब्ध है?
- दोनों स्थानों पर बुनियादी ढांचे की वर्तमान स्थिति क्या है?
इन सवालों के स्पष्ट जवाब ही अंतिम निर्णय की दिशा तय करेंगे।
प्रशासन का रुख
इस मामले पर जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) गिरीश कुर्रे ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उद्देश्य लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। भूमि चयन में पहुंच, सुविधा और व्यवहारिकता को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की सहमति से लिया जाएगा।
गौरतलब है कि इस प्रस्ताव को लगभग एक वर्ष बीत चुका है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। इससे लोगों में असमंजस और असंतोष दोनों बढ़ रहे हैं।
व्यापक जनहित जरूरी
यह भी महत्वपूर्ण है कि यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केवल एक गांव या नगर के लिए नहीं, बल्कि आसपास के करीब 20 गांवों के लोगों के लिए प्रस्तावित है। ऐसे में निर्णय किसी एक क्षेत्र की मांग के आधार पर नहीं, बल्कि व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर लिया जाना जरूरी है।
अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस विवाद का समाधान कैसे करता है और आखिरकार CHC का निर्माण किस स्थान पर होता है।





