May 15, 2026

मुंगेली में रेत माफियाओं का आतंक: कार्रवाई करने गई वन टीम पर जानलेवा हमला, 2 गंभीर

मुंगेली। जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर रेत माफियाओं ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में दो वनकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि अन्य कर्मचारियों को भी चोटें आई हैं। घटना के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है और पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है।

जानकारी के अनुसार, 10 अप्रैल 2026 की रात वन विभाग की टीम को अवैध रेत उत्खनन की सूचना मिली थी। इसके बाद खुड़िया वन परिक्षेत्र के सरगढ़ी परिसर में पदस्थ वन रक्षक अभिषेक बर्मन, योगेश बरेठ, देवेन्द्र बघेल समेत अन्य कर्मचारी कार्रवाई के लिए जंगल की ओर रवाना हुए। टीम जब भुक्खुनाला के पास पहुंची तो उन्हें एक ट्रैक्टर अवैध रेत से भरा हुआ मिला, जिसे मौके पर ही जब्त कर चालक राजकुमार यादव को पकड़ लिया गया।

शुरुआत में स्थिति सामान्य लग रही थी, लेकिन जैसे ही वन टीम आगे अन्य ट्रैक्टरों की तलाश में बढ़ी, कुछ वाहन अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। टीम ने एक और ट्रैक्टर पकड़ा और जब वापस लौटने लगी, तभी अचानक माहौल बदल गया।

भुक्खुनाला के पास पहले से घात लगाए बैठे रेत माफियाओं ने वन अमले को चारों ओर से घेर लिया। “ट्रैक्टर क्यों ले जा रहे हो?” जैसे सवालों के साथ शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। आरोपियों ने लाठी-डंडों, हाथ-मुक्कों से वनकर्मियों पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। इतना ही नहीं, कुछ समय के लिए उन्हें बंधक भी बना लिया गया और जान से मारने की धमकियां दी गईं।

इस हमले में वन रक्षक अभिषेक बर्मन को सिर, माथे और सीने पर गंभीर चोटें आईं, जबकि योगेश बरेठ के हाथ, पैर, गर्दन और आंख के पास गहरी चोटें दर्ज की गईं। अन्य कर्मचारियों को भी मामूली चोटें आई हैं। जंगल के बीच अंधेरे में फंसी टीम के लिए स्थिति बेहद खतरनाक हो गई थी।

घटना के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर स्थिति को संभालने की कोशिश की। सरपंच चंदर तिलगाम और नरेश तिलगाम समेत अन्य लोगों की मदद से वनकर्मियों को आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया गया। इसके बाद सभी घायलों को तत्काल लोरमी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल अभिषेक बर्मन को बिलासपुर रेफर किया गया।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। कलेक्टर कुंदन कुमार और डीएफओ अभिनव कुमार के निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और आरोपियों की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि अवैध रेत खनन में लगे माफियाओं के हौसले कितने बुलंद हो चुके हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अब सरकारी अमले की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती नजर आ रही है। वन विभाग और पुलिस ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में ऐसे अवैध गतिविधियों के खिलाफ और सख्त अभियान चलाया जाएगा।