May 16, 2026

आदिवासी परिवारों पर बयान से सियासत तेज, नंद कुमार साय के ‘5 बच्चे’ वाले बयान पर विवाद

रायपुर। सर्व आदिवासी समाज की बैठक में वरिष्ठ आदिवासी नेता नंद कुमार साय द्वारा आदिवासी परिवारों से कम से कम पांच बच्चे पैदा करने की अपील के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है। उनके इस बयान को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाकर भाजपा पर निशाना साधा है, वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे व्यक्तिगत विचार बताते हुए दूरी बना ली है।

दरअसल, बैठक के दौरान नंद कुमार साय ने आदिवासी समाज की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि “हम दो, हमारे दो” के नारे का सबसे अधिक पालन आदिवासी समाज ने किया, जिसके चलते उनकी आबादी में कमी आई है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या में गिरावट से समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक ताकत प्रभावित हो सकती है, इसलिए प्रत्येक परिवार को कम से कम पांच बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने आगामी जनगणना को लेकर भी समाज को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने आशंका जताई कि जनगणना में गड़बड़ी की संभावना हो सकती है, इसलिए आदिवासी समाज के लोग धर्म के कॉलम में “आदिवासी” ही दर्ज कराएं, ताकि उनकी अलग पहचान बनी रहे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह नंद कुमार साय का व्यक्तिगत विचार है। उन्होंने कहा कि नंद कुमार साय एक वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने सोच-समझकर ही अपनी बात रखी होगी।

वहीं, इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भाजपा की मंशा पर सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि नंद कुमार साय भले ही इसे निजी राय बता रहे हों, लेकिन वे भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं, ऐसे में पार्टी और सरकार को इस पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान को निजी राय बताकर पेश करना राजनीतिक बचाव का तरीका है।

बैज ने यह भी कहा कि वे स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन शिक्षित होने के नाते वे कभी इस तरह की सलाह नहीं देंगे कि परिवार में पांच बच्चे पैदा किए जाएं।

इस बयान के बाद प्रदेश में जनसंख्या, सामाजिक जिम्मेदारी और आदिवासी पहचान को लेकर नई बहस छिड़ गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।