रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव देव साय ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों, विधायकों तथा महिला संगठनों को पत्र लिखकर इस ऐतिहासिक विधेयक के समर्थन की अपील की है।
मुख्यमंत्री ने यह पत्र सोशल मीडिया पर भी साझा किया है और इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर बताया है।
16 अप्रैल से संसद में होगी महत्वपूर्ण चर्चा
सीएम साय ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 16 अप्रैल 2026 से संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर अहम चर्चा प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक लोकतांत्रिक व्यवस्था में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।
33 प्रतिशत महिला आरक्षण पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह अधिनियम लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और दूरगामी कदम है।
उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से इस विषय पर सक्रिय और सकारात्मक भूमिका निभाने की अपील करते हुए कहा कि यह केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बड़ा प्रयास है।
सांसदों से संसद में सक्रिय भूमिका की अपील
मुख्यमंत्री साय ने सभी सांसदों से आग्रह किया कि वे संसद में इस अधिनियम के समर्थन में मजबूत और प्रभावी भूमिका निभाएं, ताकि यह विधेयक तेजी से और प्रभावी रूप से लागू हो सके। उन्होंने कहा कि यह अवसर लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने का माध्यम है।
विधायकों को जनजागरूकता की जिम्मेदारी
विधायकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ पहले से ही महिला सशक्तीकरण में अग्रणी राज्य रहा है। उन्होंने कहा कि पंचायतों और स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण पहले से लागू है, जो राज्य की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।
सीएम ने विधायकों से अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस अधिनियम के समर्थन में सकारात्मक जनमत तैयार करें और लोगों को इसके महत्व के बारे में जागरूक करें।
महिला संगठनों से जनआंदोलन बनाने की अपील
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की सभी महिला संगठनों और मातृशक्ति से भी इस पहल में सक्रिय भागीदारी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सशक्त भविष्य का प्रतीक है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यदि महिलाएं स्वयं आगे आएंगी तो यह पहल एक मजबूत जनआंदोलन का रूप ले लेगी और देश के लोकतंत्र को अधिक समावेशी और सशक्त बनाएगी।





