रायपुर। राजधानी में साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे “ऑपरेशन साइबर शील्ड” के तहत रायपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने फर्जी सिम कार्ड बेचने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन आरोपियों को दुर्ग, रायपुर, बलौदाबाजार के साथ-साथ पश्चिम बंगाल से भी पकड़ा गया है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा बेचे गए सिम कार्ड का इस्तेमाल म्यूल बैंक खातों, टेलीग्राम रिव्यू टास्क, ऑनलाइन जॉब फ्रॉड, फेक सोशल मीडिया फ्रॉड, शेयर ट्रेडिंग और सस्ते सामान बेचने के नाम पर ठगी जैसे मामलों में किया जा रहा था। अब तक 300 से अधिक फर्जी सिम से जुड़ी अहम जानकारी पुलिस को मिली है।
पहले मामले में थाना माना (रायपुर ग्रामीण) में दर्ज अपराध में 20.28 लाख रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है, जिसमें इंडसइंड बैंक के म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम का इस्तेमाल किया गया। वहीं दूसरे मामले में थाना आजाद चौक में दर्ज प्रकरण में 6.42 लाख रुपये की ठगी सामने आई, जिसमें साउथ इंडियन बैंक के म्यूल अकाउंट और मोबाइल सिम शामिल थे। दोनों मामलों की जांच रेंज साइबर थाना रायपुर द्वारा की जा रही है।
तकनीकी विश्लेषण, सिम सेवा प्रदाताओं से प्राप्त जानकारी, पीड़ितों और गवाहों के बयान तथा पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस गिरोह का खुलासा हुआ। पुलिस ने सुदीप्त सासमल, शिवनारायण साहू, जयंत लहरी, मनीष आहूजा, कैलाश प्रताप सिंह, विनोद वर्मा सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी वीआई, जियो और एयरटेल कंपनियों के सिम कार्ड बेचने का काम करते थे। वे नए सिम लेने या पोर्ट कराने वाले ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर अतिरिक्त सिम सक्रिय कर लेते थे। ई-केवाईसी के दौरान डबल थंब स्कैन और आई ब्लिंक जैसी प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल कर फर्जी सिम तैयार किए जाते थे। जिन ग्राहकों के पास आधार कार्ड की फिजिकल कॉपी होती थी, उनके दस्तावेजों का उपयोग डी-केवाईसी के जरिए अतिरिक्त सिम जारी करने में किया जाता था।
इन फर्जी सिम को बाद में ऊंचे दामों पर साइबर अपराधियों को बेचा जाता था। पुलिस ने फर्जी सिम खरीदने वाले दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और इससे जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।





