May 15, 2026

रायपुर: फरहदा गांव में 450 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा, श्मशान घाट तक नहीं बचा; ग्रामीणों का गंभीर आरोप

Raipur जिले के Dharshiwa Assembly क्षेत्र अंतर्गत ग्राम फरहदा में बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन पर कब्जे के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि करीब 450 एकड़ ग्राम पंचायत भूमि पर रसूखदारों ने अवैध कब्जा कर लिया है, जिससे गांव में श्मशान घाट तक की जमीन उपलब्ध नहीं बची है।

450 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप

ग्रामीणों के अनुसार गांव की बड़ी मात्रा में सरकारी भूमि पर लंबे समय से प्रभावशाली लोगों का कब्जा है। इसमें श्मशान भूमि, खेल मैदान, पशु चरागाह और अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनें भी शामिल हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर 40 से 50 एकड़ तक की जमीन पर एकल व्यक्तियों द्वारा कब्जा किया गया है।

अंतिम संस्कार के लिए जगह तक नहीं

सबसे गंभीर स्थिति श्मशान घाट को लेकर है। ग्रामीणों का आरोप है कि श्मशान भूमि पर भी कब्जा हो चुका है, जिसके कारण किसी की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार तालाब के मेड़ पर करना पड़ता है।

यह स्थिति गांव में गंभीर सामाजिक और मानवीय संकट पैदा कर रही है।

खेल मैदान और चारागाह भूमि भी प्रभावित

जानकारी के अनुसार, पूर्व में सरकार द्वारा स्वीकृत खेल मैदान की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है।

इसके अलावा पशु चरागाह भूमि पर भी अतिक्रमण होने से ग्रामीण अपने मवेशियों को बाहर चराने के लिए मजबूर हैं।

कोतवाल की जमीन पर भी कब्जे का आरोप

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि गांव की कोतवाल प्रणाली से जुड़ी भूमि पर भी कब्जा कर लिया गया है, जिसके चलते संबंधित व्यक्ति न्याय के लिए प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।

ग्रामीणों और सरपंच की पहल

गांव के नए युवा सरपंच ने ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर सभी सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की पहल शुरू की है।

प्रस्ताव में कहा गया है कि जिन स्थानों पर आवास बने हैं, उन्हें छोड़कर अन्य कब्जों को हटाया जाए ताकि किसी ग्रामीण का घर प्रभावित न हो।

प्रशासन को कई बार आवेदन, कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को कई बार आवेदन देकर भूमि चिन्हांकन की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन इस मामले में उदासीन रवैया अपनाए हुए है।

ग्रामीणों का आरोप – रसूखदारों को संरक्षण

ग्रामीणों का कहना है कि कब्जाधारी कथित रूप से प्रभावशाली लोगों से जुड़े हुए हैं, जिसके कारण कार्रवाई नहीं हो रही है।

हालांकि, इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

कलेक्टर का बयान

Gaurav Kumar Singh ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


फरहदा गांव में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जे के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द जमीन की पहचान कर अतिक्रमण हटाया जाए, ताकि गांव में मूलभूत सुविधाएं बहाल हो सकें।