May 15, 2026

रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ का घोटाला: 4 अधिकारी निलंबित, अवैध जमीन को वैध बनाने की साजिश उजागर

रायपुर। नगर निगम में 100 करोड़ रुपए से अधिक के कथित भ्रष्टाचार मामले में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। निलंबित किए गए अधिकारियों में जोन क्रमांक-10 के तत्कालीन जोन कमिश्नर विवेकानंद दुबे, कार्यपालन अभियंता आशीष शुक्ला, इंजीनियर योगेश यादव और अजय श्रीवास्तव शामिल हैं।

आयुक्त ने बताया कि चार सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। इसके बाद तत्काल प्रभाव से निलंबन की कार्रवाई की गई है। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है। मामले में विधिक कार्रवाई के साथ-साथ वेतन वृद्धि पर भी रोक लगाने की बात कही गई है।

150 एकड़ जमीन को अवैध तरीके से वैध बनाने की साजिश
जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला करीब 150 से 159 एकड़ जमीन को गलत तरीके से वैध करने से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि पूरी प्रक्रिया में नगर निगम मुख्यालय को दरकिनार कर संरचना अनुमोदन (Structure Approval) और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) अप्रूवल में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।

जांच में मिली बड़ी खामियां
मामले की जांच के लिए गठित चार सदस्यीय कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं का खुलासा किया है। समिति के अध्यक्ष अपर आयुक्त (नगर निवेश) पंकज शर्मा थे, जबकि आभाष मिश्रा, आशुतोष सिंह और सोहन गुप्ता सदस्य के रूप में शामिल थे। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जांच के दौरान कई बार मूल दस्तावेज (नस्ती) मांगे गए, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे पूरे मामले में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है।

फाइल गायब, प्रक्रिया को किया गया बायपास
नियमों के अनुसार किसी भी प्रस्ताव की फाइल पहले जोन से निगम मुख्यालय पहुंचती है, जहां आयुक्त की मंजूरी के बाद उसे TNC विभाग भेजा जाता है। लेकिन इस मामले में जोन क्रमांक-10 से फाइल सीधे TNC भेज दी गई। आयुक्त को पूरी प्रक्रिया से अलग रखा गया। जब फाइल वापस आयुक्त के पास पहुंची, तब उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसी किसी फाइल को स्वीकृति नहीं दी है। इसके बाद मूल फाइल मंगाई गई, जो गायब पाई गई।

70 से अधिक खसरा नंबरों की फाइलों पर सवाल
घोटाले में 70 से अधिक खसरा नंबरों से जुड़ी फाइलों के गायब होने की बात सामने आई है। आरोप है कि दलालों, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से अवैध कॉलोनियों को वैध बनाने का खेल खेला गया। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने इसे 100 करोड़ से अधिक का घोटाला बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

इन क्षेत्रों से जुड़ा मामला
यह पूरा प्रकरण बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्र के भूखंडों से जुड़ा हुआ है, जो कामरेड सुधीर मुखर्जी वार्ड क्रमांक-54 के अंतर्गत आते हैं।

आगे की कार्रवाई जारी
नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मामले में दोषी पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों और संबंधित लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल की जा रही है।