रायपुर। रायपुर नगर निगम में 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) और मार्ग संरचना अप्रूवल के नाम पर नियम-कानूनों को दरकिनार कर फाइलें पास करने और बाद में मूल दस्तावेज गायब होने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले में 70 से अधिक खसरा नंबरों की फाइलें गायब होने और अधिकारियों-बिल्डरों की मिलीभगत जैसे सवाल उठे हैं, जिस पर जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
बताया जा रहा है कि नगर निगम में TNC और अप्रूवल प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं बरती गईं। आरोप है कि निजी बिल्डरों को फायदा पहुंचाने के लिए पूरी प्रक्रिया को बायपास किया गया। मामले की जानकारी सामने आते ही संबंधित 70 से अधिक खसरा नंबरों की मूल फाइलें गायब कर दी गईं।
अवैध कॉलोनियों को वैध करने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि यह 100 करोड़ रुपये से अधिक का सुनियोजित घोटाला है, जिसमें दलालों, बिल्डरों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत शामिल है। उन्होंने कहा कि अवैध कॉलोनियों को अवैध तरीके से वैध करने का षड्यंत्र रचा गया और जैसे ही मामला सामने आया, मूल दस्तावेज गायब कर दिए गए।
इन इलाकों से जुड़ा मामला
यह मामला बोरियाखुर्द, ओम नगर, साई नगर और बिलाल नगर क्षेत्र के भूखंडों से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां 70 से अधिक खसरा नंबरों में गड़बड़ी सामने आई है।
प्रक्रिया को किया गया बायपास
नियम के अनुसार फाइल पहले जोन से निगम मुख्यालय, फिर कमिश्नर और उसके बाद TNC विभाग होकर वापस कमिश्नर के पास जाती है। लेकिन इस मामले में जोन-10 से फाइल सीधे TNC विभाग भेज दी गई और निगम कमिश्नर को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया। जब फाइल कमिश्नर के पास पहुंची, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने ऐसी किसी फाइल को अप्रूव नहीं किया है। इसके बाद जब मूल नस्ती मंगाई गई, तो वह गायब मिली।
आयुक्त ने दिए जांच के आदेश
नगर निगम आयुक्त विश्वदीप ने माना कि प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और गड़बड़ियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जोन-10 के आयुक्त ने भी आधिकारिक रूप से पत्र जारी कर मूल नस्ती गुम होने की जानकारी दी है।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मामले को “सिस्टमेटिक घोटाला” बताते हुए उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला कोर्ट तक ले जाया जाएगा।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण ने नगर निगम की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट का इंतजार है।





