रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाला मामले में पूर्व IAS अधिकारी Anil Tuteja को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उन्हें जमानत दे दी।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की बेंच में हुई। इस केस में अधिवक्ता अर्शदीप सिंह खुराना, हर्ष श्रीवास्तव, चेतन नेगपाल, खुशबू जैन, ईश कुमार वर्मा और आयुष्मान सिंह ने पैरवी की।
जानकारी के अनुसार अनिल टुटेजा फिलहाल रायपुर जेल में बंद हैं और करीब 2 साल 4 महीने बाद मंगलवार को जेल से रिहा होंगे।

कोर्ट में पेश हुआ दूसरा पूरक चालान
इसी बीच DMF घोटाला मामले में एसीबी/EOW ने रायपुर कोर्ट में दूसरा पूरक चालान भी पेश किया है। यह चालान पूर्व IAS अनिल टुटेजा और सतपाल सिंह छाबड़ा के खिलाफ विशेष न्यायाधीश की अदालत में प्रस्तुत किया गया।
जांच एजेंसी ने करीब 5 हजार पन्नों का पूरक चालान कोर्ट में जमा किया है, जिसमें वित्तीय लेन-देन, दस्तावेजी साक्ष्य, बयान और जांच से जुड़े कई अहम तथ्यों को शामिल किया गया है।
क्या है DMF घोटाला?
जानकारी के मुताबिक Enforcement Directorate की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120B और 420 के तहत मामला दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) फंड से जुड़े टेंडरों में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं।
आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में ठेकेदारों और बिचौलियों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार इस मामले में संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी समेत कई लोगों की भूमिका सामने आई है।
कमीशनखोरी के आरोप
जांच में यह भी दावा किया गया कि DMF परियोजनाओं में कमीशनखोरी के लिए फंड खर्च के नियमों में बदलाव किए गए थे। आरोप है कि कलेक्टर को 40 प्रतिशत, सीईओ को 5 प्रतिशत, एसडीओ को 3 प्रतिशत और सब इंजीनियर को 2 प्रतिशत तक कमीशन दिया गया।
ED की जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को भारी कमीशन दिया, जो कॉन्ट्रैक्ट राशि का 25 से 40 प्रतिशत तक बताया गया है।
तलाशी के दौरान 76.50 लाख रुपये नकद, कई बैंक खाते, फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी जब्त किए गए थे।





