May 15, 2026

रायपुर में गहराया जल संकट: 70 में से 35 वार्डों में पानी की किल्लत, टैंकर बना सहारा

Raipur। गर्मी बढ़ने के साथ ही राजधानी रायपुर में जल संकट गहराता जा रहा है। शहर के 70 वार्डों में से लगभग 35 वार्डों में पानी की गंभीर किल्लत सामने आई है, जिससे हजारों नागरिकों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति बाधित हो चुकी है और लोगों को वैकल्पिक इंतजामों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

इस पूरे मामले पर महापौर Meenal Choubey ने कहा कि शहर में जल स्रोत लगातार सूख रहे हैं, जबकि जनसंख्या तेजी से बढ़ रही है। उपलब्ध संसाधन सीमित हैं और मांग बढ़ने के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति ही एकमात्र विकल्प बचा है।

महापौर के अनुसार, जिन वार्डों में पानी की समस्या ज्यादा है, वहां नगर निगम द्वारा नियमित रूप से टैंकर भेजे जा रहे हैं। इस वर्ष पानी आपूर्ति को सुचारू रखने के लिए करीब 1 करोड़ 50 लाख रुपये का टेंडर टैंकर सेवा के लिए जारी किया गया है, जो पिछले वर्ष के मुकाबले अधिक है। इससे यह साफ है कि समस्या का दायरा और गंभीरता दोनों बढ़ी है।

उन्होंने यह भी बताया कि जल प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए जल बोर्ड का गठन किया गया है, जो शहर में जल आपूर्ति व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में काम करेगा। हालांकि, वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह प्रयास अभी शुरुआती चरण में ही नजर आ रहा है।

भूजल स्तर को सुधारने और भविष्य में संकट से बचने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अहम उपाय माना जा रहा है। इस पर महापौर ने कहा कि नगर निगम के विभिन्न जोनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के लिए पहले से 8 से 10 करोड़ रुपये तक की राशि जमा थी, लेकिन लोगों द्वारा अपने मकानों में सिस्टम नहीं लगाए जाने के कारण यह राशि राजसात कर ली गई।

अब निगम इस राशि का उपयोग ठेका प्रणाली के माध्यम से घरों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए करेगा। इससे उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में भूजल स्तर में सुधार होगा और जल संकट की समस्या कुछ हद तक कम हो सकेगी।

हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि पिछले दो वर्षों से इस दिशा में घोषणाएं की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी है। ऐसे में नागरिकों को फिलहाल टैंकरों पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है और स्थायी समाधान का इंतजार बना हुआ है।