June 21, 2026

कोरर थाना में दिखी बस्तर की अनोखी परंपरा, तबादले पर थाना प्रभारी का ‘डोर छेकना’ कर दी गई विदाई

भानुप्रतापपुर। कांकेर जिले के कोरर थाना में शनिवार को विदाई समारोह के दौरान बस्तर की पारंपरिक संस्कृति की अनोखी झलक देखने को मिली। थाना प्रभारी जीतेन्द्र गुप्ता के बिलासपुर तबादले पर महिला कर्मचारियों ने बस्तर की प्रसिद्ध “डोर छेकना” रस्म निभाकर उन्हें भावभीनी विदाई दी।

जानकारी के अनुसार, हाल ही में कोरर थाना प्रभारी जीतेन्द्र गुप्ता का तबादला बिलासपुर किया गया है। शनिवार को जब वे अपने नए पदस्थापन स्थल के लिए रवाना हो रहे थे, तब थाना परिसर में मौजूद महिला कर्मचारियों ने उनकी गाड़ी के सामने प्रतीकात्मक डोर लगाकर रास्ता रोक लिया।

बस्तर की परंपरा के अनुसार रास्ता रोकने के बाद महिला कर्मचारियों ने नेग की मांग की। इस दौरान थाना प्रभारी ने भी हंसी-खुशी भेंट स्वरूप राशि प्रदान की। नेग मिलने के बाद डोर हटाई गई और उन्हें शुभकामनाओं के साथ विदाई दी गई। इस भावुक और आत्मीय क्षण का थाना परिसर में मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भी आनंद लिया।

विदाई समारोह के दौरान पारंपरिक रस्म ने पूरे माहौल को भावुक और यादगार बना दिया। उपस्थित कर्मचारियों ने कहा कि बस्तर की संस्कृति में ऐसी परंपराएं आपसी सम्मान, स्नेह और रिश्तों की गर्माहट को बनाए रखती हैं।

क्या है डोर छेकना परंपरा?

बस्तर अंचल में डोर छेकना एक पारंपरिक लोक रस्म है, जिसे सम्मान और अपनत्व का प्रतीक माना जाता है। किसी अतिथि, दामाद या सम्मानित व्यक्ति की विदाई के समय परिजन या ग्रामीण प्रतीकात्मक रूप से उसका रास्ता रोककर नेग मांगते हैं। नेग या भेंट मिलने के बाद ही रास्ता खोला जाता है। यह परंपरा वर्षों से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रही है।

कोरर थाना में निभाई गई यह रस्म न केवल एक विदाई समारोह को खास बना गई, बल्कि बस्तर की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं को भी जीवंत रूप में सामने लेकर आई।