May 16, 2026

अचानकमार के जंगलों में पहुंचा तेंदुलकर परिवार: आदिवासी गांव में शिक्षा-स्वास्थ्य का लिया जायजा

लोरमी: छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के घने जंगलों में बसे अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) के सुदूर वनांचल ग्राम बम्हनी में उस समय खास हलचल और उत्साह का माहौल बन गया, जब देश के महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का परिवार यहां पहुंचा। आमतौर पर बाहरी दुनिया से कटे रहने वाले इस आदिवासी गांव में इतने बड़े परिवार का आगमन अपने आप में एक विशेष घटना बन गया।

इस दौरान सचिन तेंदुलकर की पत्नी डॉ. अंजली तेंदुलकर, बेटी सारा तेंदुलकर और बहू सानिया चंडोक तेंदुलकर ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों से आत्मीय मुलाकात की और वहां संचालित शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का जमीनी स्तर पर जायजा लिया।

ग्रामीणों ने किया पारंपरिक स्वागत

तेंदुलकर परिवार के गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय ग्रामीण, खासकर महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में स्वागत के लिए पहले से तैयार नजर आईं। उन्होंने पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत पुष्प गुच्छ भेंट कर अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

गांव के बच्चों और युवाओं में भी इस दौरे को लेकर खास उत्साह देखने को मिला। कई लोग पहली बार इतने बड़े नाम से जुड़ी हस्तियों को अपने बीच पाकर भावुक भी नजर आए।

दौरे का उद्देश्य: जमीनी हकीकत समझना

इस एक दिवसीय दौरे का मुख्य उद्देश्य आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को समझना था।

क्षेत्र में गनियारी जनस्वास्थ्य समिति द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं और बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। तेंदुलकर परिवार इसी समिति के कार्यों का मूल्यांकन करने और उनकी प्रभावशीलता को समझने के लिए चिकित्सकों की टीम के साथ यहां पहुंचा था।

फुलवारी केंद्र और बालवाड़ी का निरीक्षण

दौरे के दौरान डॉ. अंजली तेंदुलकर और सारा तेंदुलकर ने फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया, जहां छोटे बच्चों की देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है।

इसके बाद उन्होंने बालवाड़ी पहुंचकर बच्चों से सीधे संवाद किया। बच्चों के रहन-सहन, खान-पान, पढ़ाई की व्यवस्था और शिक्षकों की उपलब्धता को लेकर उन्होंने विस्तार से जानकारी ली।

उन्होंने यह भी जानने की कोशिश की कि जंगलों के बीच बसे इन गांवों में बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने में किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष फोकस

तेंदुलकर परिवार ने जनस्वास्थ्य सेवाओं को भी प्राथमिकता दी। उन्होंने गनियारी जन स्वास्थ्य केंद्र का दौरा कर वहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सेवाओं का जायजा लिया।

ग्रामीणों से बातचीत के दौरान यह जानने की कोशिश की गई कि उन्हें इलाज के लिए किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए क्या किया जा सकता है।

ग्रामीणों से सीधा संवाद

दौरे के दौरान तेंदुलकर परिवार ने ग्रामीणों से खुलकर बातचीत की। उन्होंने गांव की महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं से उनके जीवन, रोजमर्रा की समस्याओं और सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर चर्चा की।

ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याओं और जरूरतों को खुलकर सामने रखा, जिससे इस दौरे को एक संवादात्मक रूप मिला।

गोपनीय रखा गया था दौरा

सूत्रों के अनुसार, तेंदुलकर परिवार का यह दौरा पूरी तरह गोपनीय रखा गया था, ताकि बिना किसी भीड़भाड़ और औपचारिकता के वे जमीनी हकीकत को समझ सकें।

हालांकि, जैसे ही उनके गांव पहुंचने की खबर फैली, आसपास के क्षेत्रों से भी लोग उन्हें देखने और मिलने के लिए पहुंचने लगे।

आज मुंबई के लिए रवाना होंगे

बताया जा रहा है कि तेंदुलकर परिवार शाम को बिलासपुर से मुंबई के लिए रवाना होगा। यह दौरा भले ही एक दिन का था, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक क्षेत्र में महसूस किया जाएगा।

क्षेत्र में जगी नई उम्मीद

तेंदुलकर परिवार की इस यात्रा ने न केवल ग्रामीणों में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाया है, बल्कि आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की ओर भी व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के दौरे से न सिर्फ स्थानीय संस्थाओं को प्रोत्साहन मिलता है, बल्कि नीति-निर्माण स्तर पर भी इन क्षेत्रों की समस्याओं को समझने में मदद मिलती है।