May 15, 2026

सक्ती: वेदांता पावर प्लांट बॉयलर ब्लास्ट में मौत का आंकड़ा 10 पहुंचा, परिजनों का गेट पर हंगामा, मुआवजे और नौकरी की मांग तेज

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना में अब तक 10 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 24 से अधिक श्रमिक गंभीर रूप से घायल हैं। कई घायलों की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

कैसे हुआ भीषण हादसा

डभरा थाना क्षेत्र के ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में अचानक बॉयलर फटने से जोरदार धमाका हुआ। धमाका इतना भीषण था कि पूरे प्लांट परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कई मजदूर इसकी चपेट में आ गए।

घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

घायलों का इलाज जारी, कई की हालत गंभीर

हादसे के बाद घायलों को तत्काल रायगढ़ के सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों की स्थिति बेहद गंभीर है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। चिकित्सा टीम लगातार इलाज में जुटी हुई है।

परिजनों का गुस्सा फूटा, प्लांट गेट पर हंगामा

घटना के बाद मृतकों और घायलों के परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। बड़ी संख्या में लोग प्लांट के मुख्य गेट पर पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें सही जानकारी नहीं दी जा रही है और न ही मृतकों के पास जाने दिया जा रहा है।

एम्बुलेंस रोकी गई, स्थिति तनावपूर्ण

प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने एम्बुलेंस को बाहर जाने से रोकते हुए घायलों को दिखाने की मांग की। इसके चलते मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई।

प्लांट प्रबंधन ने हालात को देखते हुए मुख्य गेट बंद कर दिया, जबकि प्रशासन ने भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है।

मुआवजा और नौकरी की मांग तेज

परिजनों ने मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजे की मांग की है। साथ ही उन्होंने एक-एक परिवार को नौकरी देने की भी मांग उठाई है।

लोगों का कहना है कि यह हादसा गंभीर लापरवाही का परिणाम है और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

सीएम साय ने जताया दुख, जांच के आदेश

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।


सक्ती का यह दर्दनाक हादसा औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लगातार बढ़ते मौत के आंकड़े और परिजनों का आक्रोश स्थिति को और संवेदनशील बना रहे हैं।