जगदलपुर। बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के प्रभाव के बाद अब हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। कभी जो इलाके सुरक्षा और ऑपरेशन के लिए जाने जाते थे, अब उन्हें विकास और जनसेवा से जोड़ने की नई पहल शुरू की जा रही है। केंद्र और राज्य सरकार की रणनीति के तहत फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस (FOB) यानी सुरक्षा कैंपों को अब बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत सुरक्षा कैंप केवल सुरक्षाबलों की तैनाती तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इन्हें स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच एक सेतु के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। इसी पहल की शुरुआत जल्द ही देश के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नेतनार स्थित सीआरपीएफ कैंप से किए जाने की संभावना है।
ग्रामीणों के लिए डिजिटल और विकास सेवाएं
नई योजना के तहत बस्तर संभाग के सुरक्षा कैंपों के कुछ हिस्सों में जनसुविधा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यहां ग्रामीणों को डिजिटल सेवा केंद्र की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे सरकारी योजनाओं और दस्तावेजी सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान होगी। इसके साथ ही युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
इसके अलावा जंगल आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए माइनर फॉरेस्ट प्रोड्यूस की प्रोसेसिंग यूनिट्स भी इन कैंपों में विकसित की जाएंगी। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आर्थिक अवसर मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आईजी ने दी जानकारी
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि क्षेत्र में नक्सली गतिविधियां अब काफी हद तक समाप्त हो चुकी हैं। ऐसे में सुरक्षा कैंपों के कुछ हिस्सों को जनता की मूलभूत सुविधाओं के लिए उपयोग करने की योजना तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसमें डिजिटल सेवा केंद्र, स्किल डेवलपमेंट ट्रेनिंग और फॉरेस्ट प्रोडक्ट प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियां शामिल होंगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरी योजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।





