July 30, 2026

स्मार्ट मीटर से बढ़ रहा बिजली बिल या बढ़ी खपत? जानिए हर सवाल का जवाब और उपभोक्ताओं के अधिकार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों बढ़े हुए बिजली बिल को लेकर उपभोक्ताओं के बीच कई तरह की चर्चाएं और शिकायतें सामने आ रही हैं। कई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर को अधिक बिल आने की वजह मान रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर भी स्मार्ट मीटर को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं। इन सभी सवालों और भ्रमों को लेकर छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) ने उपभोक्ताओं के लिए विस्तृत जानकारी जारी करते हुए स्मार्ट मीटर, बिजली खपत, लोड एन्हांसमेंट और शिकायत प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दिए हैं।

स्मार्ट मीटर से बिल अपने आप नहीं बढ़ता

बिजली कंपनी के अनुसार स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिल अपने आप नहीं बढ़ता। बिल बढ़ने के पीछे वास्तविक बिजली खपत, वायरिंग में खराबी, लीकेज करंट या घर के खराब विद्युत उपकरण भी कारण हो सकते हैं। स्मार्ट मीटर केवल वास्तविक बिजली खपत को रिकॉर्ड करता है।

क्या स्मार्ट मीटर ज्यादा रीडिंग दर्ज करता है?

कंपनी का कहना है कि स्मार्ट मीटर पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर की तुलना में तेज रीडिंग नहीं लेता। यह BIS और CEA के निर्धारित मानकों के अनुसार परीक्षण के बाद ही लगाया जाता है। यदि किसी उपभोक्ता को संदेह है तो वह मीटर परीक्षण का अनुरोध भी कर सकता है।

क्या सभी उपभोक्ताओं के मीटर प्री-पेड होंगे?

कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आम घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पोस्ट-पेड व्यवस्था ही जारी रहेगी। प्री-पेड मीटर केवल शासकीय कार्यालयों और सरकारी भवनों में लागू किए जा रहे हैं। आम उपभोक्ताओं के लिए प्री-पेड मीटर लागू होने की खबरें भ्रामक हैं।

स्टैंडबाय मोड में भी होती है बिजली की खपत

टीवी, राउटर, चार्जर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण स्टैंडबाय मोड में भी थोड़ी-बहुत बिजली खर्च करते हैं। कंपनी ने सलाह दी है कि उपयोग नहीं होने पर उपकरणों को केवल रिमोट से नहीं बल्कि मुख्य स्विच से बंद करें।

‘मोर बिजली’ ऐप से करें अपनी खपत की निगरानी

बिजली कंपनी ने उपभोक्ताओं को ‘मोर बिजली’ मोबाइल एप डाउनलोड करने की सलाह दी है। इस ऐप के माध्यम से उपभोक्ता रोजाना की बिजली खपत, अनुमानित मासिक यूनिट, पिछले महीनों की खपत और स्मार्ट मीटर की रियल-टाइम रीडिंग देख सकते हैं। यदि सभी उपकरण बंद होने के बावजूद मीटर रीडिंग बढ़ती दिखाई दे तो इसकी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

स्मार्ट मीटर क्यों कहलाता है ‘स्मार्ट’?

कंपनी के मुताबिक स्मार्ट मीटर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह बिजली खपत का डेटा रियल टाइम में डेटा सेंटर तक भेजता है। पुराने इलेक्ट्रॉनिक मीटर भी लगभग उतनी ही सटीक रीडिंग दर्ज करते थे, लेकिन उनमें डेटा संचारण की सुविधा नहीं थी। स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर लगातार नजर रखने और अनावश्यक बिजली उपयोग कम करने में मदद करता है।

बिजली बिल अचानक बढ़ने के पीछे क्या हो सकते हैं कारण?

कंपनी ने बताया कि हाल के महीनों में अधिक गर्मी के कारण एसी, कूलर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग बढ़ा है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहन, इंडक्शन चूल्हे और नए उपकरणों के इस्तेमाल से भी खपत बढ़ी है। कई मामलों में लोड एन्हांसमेंट (भार वृद्धि) का शुल्क भी बिल में एक बार जोड़ा गया है। वहीं 400 यूनिट से अधिक खपत होने पर मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना का लाभ भी समाप्त हो सकता है।

क्या है लोड एन्हांसमेंट चार्ज?

यदि किसी उपभोक्ता की बिजली की अधिकतम मांग लगातार तीन महीने तक स्वीकृत भार से अधिक रहती है, तो विद्युत नियामक आयोग के नियमों के अनुसार उसका स्वीकृत लोड बढ़ा दिया जाता है और 800 रुपये प्रति किलोवाट की दर से एकमुश्त भार वृद्धि शुल्क लिया जाता है। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क हर महीने नहीं लिया जाता।

मीटर की जांच कैसे कराएं?

यदि किसी उपभोक्ता को मीटर की कार्यप्रणाली पर संदेह है तो वह 1912 टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज करा सकता है या नजदीकी बिजली कार्यालय में चेक मीटर लगाने का अनुरोध कर सकता है। इसके अलावा भिलाई स्थित NABL प्रमाणित सेंट्रल टेस्टिंग लैब तथा रायपुर और बिलासपुर में भी मीटर जांच की सुविधा उपलब्ध है। जांच के लिए सिंगल फेज मीटर पर 375 रुपये और थ्री फेज मीटर पर 450 रुपये शुल्क निर्धारित है।

क्या रिमोट से मीटर की रीडिंग बदली जा सकती है?

बिजली कंपनी ने ऐसे सभी दावों को खारिज करते हुए कहा है कि रिमोट या मोबाइल सिग्नल के जरिए मीटर की रीडिंग या बिल में फेरबदल संभव नहीं है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे दावों के समर्थन में कोई विश्वसनीय तकनीकी प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंधक (जनसंपर्क एवं औद्योगिक संबंध) विकास शर्मा ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि यदि उन्हें बिल या मीटर को लेकर कोई शिकायत है तो सोशल मीडिया पर भरोसा करने के बजाय अधिकृत शिकायत तंत्र का उपयोग करें। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई तकनीकी त्रुटि पाई जाती है तो उसका नियमानुसार सुधार किया जाएगा।