रायपुर। राजधानी रायपुर में गुरुमुख नगर पचपेड़ी नाका से भाटागांव तक प्रस्तावित कैनाल रोड 2.0 परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। परियोजना के तहत कई घरों को हटाए जाने की संभावना के विरोध में प्रभावित परिवारों ने सोमवार को नगर निगम कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें 80 फीट चौड़ी सड़क स्वीकार नहीं है और वे अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
जानकारी के अनुसार, यह क्षेत्र पिछले 40 वर्षों से अधिक समय से बसा हुआ है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना किसी पूर्व सूचना, सर्वे या पुनर्वास योजना के उन्हें बेघर करने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि नहर के बीच मौजूद खंभों को हटाकर ही सड़क चौड़ी की जा सकती है, जिससे घरों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
प्रभावित परिवारों ने बताया कि कई लोगों ने कर्ज लेकर और जमीन बेचकर अपने घर बनाए हैं और आज भी बैंक लोन चुका रहे हैं। ऐसे में घर टूटने से वे पूरी तरह बेघर हो जाएंगे। महिलाओं ने कहा कि वे आसपास के क्षेत्रों में मजदूरी और घरेलू काम कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, और विस्थापन की स्थिति में उनकी आजीविका भी प्रभावित होगी।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने 14 अप्रैल और 22 अप्रैल 2026 को सांसद और नगर निगम को आवेदन सौंपकर अपनी समस्या बताई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेताओं ने घर न तोड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि कैनाल रोड 2.0 का प्रस्ताव डीपीआर के तहत तैयार कर राज्य शासन को भेजा गया है और आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि क्षेत्र में भारतमाला परियोजना, रिंग रोड-1 के विस्तार और प्रस्तावित रिंग रोड-5 जैसी परियोजनाओं से यातायात का दबाव कम किया जा सकता है, इसलिए कैनाल रोड चौड़ीकरण के लिए घरों को तोड़ना जरूरी नहीं है।
फिलहाल, विरोध के बीच प्रभावित परिवारों का प्रदर्शन जारी है और उन्होंने प्रशासन से परियोजना को नहर तक सीमित रखने और उनके घरों को सुरक्षित रखने की मांग की है।





