July 27, 2026

Bilaspur News: 24 साल पुराने हत्या के प्रयास मामले में हाईकोर्ट से आरोपी को आंशिक राहत, 2 साल की सजा घटाकर 4 महीने की

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने धमतरी के 24 वर्ष पुराने हत्या के प्रयास के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को आंशिक राहत देते हुए उसकी सजा दो वर्ष से घटाकर चार माह कर दी है। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध गंभीर प्रकृति का था और सजा का उद्देश्य अपराधों पर प्रभावी रोक लगाना होना चाहिए। अदालत ने आरोपी को 30 सितंबर 2026 तक ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है, ताकि वह शेष सजा पूरी कर सके।

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी दो साल की सजा

मामला धमतरी के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार 3 दिसंबर 2002 को दीपक कुमार ओझा और गुरु उर्फ राहुल उर्फ प्रवीण कुमार शिदे के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि विवाद के बाद मोटरसाइकिल से पहुंचे आरोपियों ने दीपक कुमार ओझा पर तलवार से हमला कर दिया। बचाव के दौरान पीड़ित की कोहनी में गंभीर चोट आई और फ्रैक्चर हो गया।

घटना के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 307/34 के तहत मामला दर्ज कर चालान न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दो वर्ष के कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में सजा कम करने की लगाई थी गुहार

आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि वह पिछले लगभग 24 वर्षों से नियमित रूप से हर सुनवाई में उपस्थित होता रहा है और जमानत का कभी दुरुपयोग नहीं किया। साथ ही उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने कहा कि सजा का उद्देश्य अपराध पर प्रभावी रोक लगाना है। सजा न तो अत्यधिक कठोर होनी चाहिए और न ही इतनी हल्की कि उसका निवारक प्रभाव समाप्त हो जाए।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए माना कि घटना वर्ष 2002 की है और लगभग 24 वर्ष बीत चुके हैं। साथ ही अभियोजन आरोपी का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सका और उसने जमानत की शर्तों का भी उल्लंघन नहीं किया। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने आईपीसी की धारा 326 के तहत दी गई सजा को घटाकर चार माह के कारावास में परिवर्तित कर दिया।

जेल में बिताई अवधि का मिलेगा लाभ

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि ट्रायल के दौरान आरोपी द्वारा जेल में बिताई गई एक माह 10 दिन की अवधि का समायोजन (सेट-ऑफ) शेष सजा में किया जाएगा।

साथ ही अदालत ने आरोपी का जमानत बांड निरस्त करते हुए उसे 30 सितंबर 2026 तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यदि वह निर्धारित तिथि तक सरेंडर नहीं करता है, तो पुलिस को उसके विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई कर न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।