बिलासपुर शहर में नाबालिगों द्वारा चोरी की घटनाओं का एक नया और चिंताजनक मामला सामने आया है। सकरी थाना क्षेत्र के आसमा सिटी में रहने वाले एक नाबालिग लड़के पर आरोप है कि उसने अपने ही घर से नगदी, जेवर और यहां तक कि अपनी मां के एटीएम कार्ड से पैसे निकालकर लाखों रुपये खर्च कर दिए। मामला पुलिस, परिजन और आरोपी के बयानों के बीच उलझता जा रहा है।
महंगे शौक और दोस्तों का दबाव बना वजह
जानकारी के अनुसार, नाबालिग लड़के पर आरोप है कि वह अपने दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और महंगे शौक पूरे करने के लिए पैसों की जरूरत में था। इसी कारण उसने घर में रखे गहने और नकदी पर हाथ साफ किया।
आरोप है कि उसने अपनी मां के बैंक खाते से एटीएम के जरिए भी पैसे निकाले और उसे अपने शौक और खर्चों में उड़ा दिया।
घर के जेवर बदलकर नकली गहने रखने का आरोप
परिजनों के अनुसार, नाबालिग ने घर से असली जेवर चुराकर उन्हें गिरवी रख दिया और बदले में नकली जेवरात घर में रख दिए, ताकि किसी को शक न हो।
जब परिवार को इस पूरे मामले की जानकारी हुई, तो घर में हड़कंप मच गया।
दोस्तों के दबाव और बयान बदलने का दावा
परिजनों का कहना है कि बाद में नाबालिग ने स्वीकार किया कि उसने यह सब अपने दोस्तों के दबाव और धमकी में आकर किया। हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके बयान बार-बार बदलते रहे हैं।
पुलिस और परिजनों में मतभेद
इस मामले में पुलिस और परिजन आमने-सामने नजर आ रहे हैं। परिजनों ने पुलिस पर कार्रवाई में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि उन्हें लगातार बयान बदलकर गुमराह किया जा रहा है।
टीआई का बयान
सकरी थाना प्रभारी विजय चौधरी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि नाबालिग ने अपने शौक और उधार चुकाने के लिए घर से गहने चुराए और उन्हें गिरवी रखकर पैसे खर्च कर दिए।
उन्होंने कहा कि परिजन पहले ही लिखित में दे चुके हैं कि वे आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहते। बाद में मां के एटीएम से पैसे निकाले जाने की शिकायत पर दोबारा जांच शुरू की गई है।
टीआई के अनुसार, परिजनों और नाबालिग दोनों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और सभी रिकॉर्ड पर हैं।
जांच पर सवाल और विवाद
मामला अब जांच प्रक्रिया और बयानबाजी को लेकर विवाद में बदल गया है। एक ओर परिजन पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं पुलिस इसे गुमराह करने और विरोधाभासी बयान देने का मामला बता रही है।
बिलासपुर का यह मामला नाबालिगों में बढ़ते महंगे शौक, सोशल दबाव और पारिवारिक नियंत्रण की कमी को उजागर करता है। साथ ही यह जांच प्रक्रिया और पारिवारिक विवादों के बीच उलझी एक संवेदनशील स्थिति बन गया है।





