रायपुर। उत्तर बस्तर कांकेर जिले में मलेरिया से संबंधित दो बच्चों की मौत के मामलों पर स्वास्थ्य विभाग ने विस्तृत जानकारी जारी की है। विभाग के अनुसार दोनों मामलों में समय पर जांच, उपचार और रेफरल की प्रक्रिया अपनाई गई थी। साथ ही संबंधित क्षेत्रों में मलेरिया मुक्त अभियान के तहत व्यापक जांच भी की गई, जिसमें 22 जुलाई को अधिकांश जांच रिपोर्ट निगेटिव पाई गई थीं।
आश्रम में बच्चों की सामूहिक जांच, पॉजिटिव मिलने पर शुरू हुआ उपचार
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, कोंडागांव जिले के विकासखंड केशकाल के ग्राम डुडेरापाल निवासी 10 वर्षीय सुभाष कुमेटी बालक आश्रम मर्दापोटी में रहकर पढ़ाई कर रहा था। 21 जुलाई को आश्रम के दो बच्चों की तबीयत खराब होने पर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां आरडी किट जांच में पीएफआर (Plasmodium Falciparum) मलेरिया की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने दोनों बच्चों को एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी।
22 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आश्रम के 46 बच्चों की जांच की, जिसमें दो अन्य बच्चे पीएफआर पॉजिटिव मिले और उनका उपचार शुरू किया गया। उस दौरान सुभाष की रिपोर्ट निगेटिव थी।
24 जुलाई को सुभाष को दोबारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उसकी जांच पीएफआर पॉजिटिव आई। उपचार की पहली खुराक देने के बाद शेष दवाइयां आश्रम अधीक्षक को उपलब्ध कराई गईं। 25 जुलाई को परिजन उसे अपने गांव ले गए। अगले दिन तबीयत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल कांकेर में भर्ती कराया गया, जहां 26 जुलाई की सुबह उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
डोमाहर्रा में तीन बच्चियां मिलीं मलेरिया पॉजिटिव
दूसरे मामले में कांकेर विकासखंड के ग्राम डोमाहर्रा निवासी तीजाराम विश्वकर्मा अपनी तीन बेटियों—रवीना (11 वर्ष), सलीना (5 वर्ष) और करीना (9 वर्ष)—को बुखार की शिकायत पर 23 जुलाई को आयुष्मान आरोग्य मंदिर लेकर पहुंचे। जांच में तीनों बच्चियां पीएफआर पॉजिटिव पाई गईं।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी को एसीटी और प्राइमाक्वीन की पहली खुराक दी तथा शेष दवा अभिभावक को उपलब्ध कराई। उसी दिन उनके घर के आसपास भी मलेरिया जांच अभियान चलाया गया। 24 जुलाई को पिता की पहली जांच निगेटिव आई, लेकिन तबीयत खराब होने पर उन्हें 108 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र धनेलीकन्हार भेजा गया। वहां दोबारा जांच में वे भी पीएफआर पॉजिटिव पाए गए और उनका उपचार शुरू किया गया।
इसी दौरान करीना की हालत गंभीर होने पर उसे मेडिकल कॉलेज कांकेर रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
मलेरिया नियंत्रण के लिए निगरानी तेज
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि दोनों प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया मुक्त अभियान के तहत लगातार जांच और निगरानी की जा रही है। विभाग का कहना है कि बुखार के मरीजों की शीघ्र पहचान, तत्काल जांच, समय पर दवा उपलब्ध कराने और गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर करने की प्रक्रिया लगातार जारी है। साथ ही मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय रखते हुए संक्रमण की रोकथाम के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।







