September 7, 2026

Jhiram Valley Case: झीरम फैसले पर भूपेश बघेल का हमला, बोले- ‘असली मास्टरमाइंड और प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?’

रायपुर। झीरम घाटी नरसंहार मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA कोर्ट के फैसले को आधा-अधूरा बताते हुए सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बघेल के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पास कोई ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश करना चाहिए।

‘असली मास्टरमाइंड और अधिकारियों पर कार्रवाई कब?’

भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को लिखे पत्र और अपने बयान में सवाल उठाया कि झीरम घाटी हमले के कथित असली मास्टरमाइंड और उस समय के प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी।

उन्होंने कहा कि सरकार को तत्कालीन मुख्यमंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों और घटना से जुड़े सरेंडर नक्सलियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की जरूरत है। बघेल ने आरोप लगाया कि घटना के पीछे कथित षड्यंत्र, प्रशासनिक चूक और नक्सलियों, अधिकारियों तथा नेताओं के बीच संभावित गठजोड़ जैसे पहलुओं की भी जांच होनी चाहिए।

‘10 लोगों को ही आरोपी क्यों बनाया?’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि झीरम घाटी हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं की हत्या हुई थी। इनमें नंदकुमार पटेल, विद्याचरण शुक्ल और महेंद्र कर्मा समेत कई नेता शामिल थे।

बघेल ने सवाल उठाया कि हमले में बड़ी संख्या में नक्सलियों के शामिल होने के बावजूद NIA मामले में केवल 10 आरोपियों को ही दोषी ठहराया गया। उन्होंने पूछा कि FIR में जिन कथित नक्सली नेताओं के नाम थे, उन्हें बाद में क्यों हटाया गया और बड़े नक्सली नेताओं की भूमिका की जांच क्यों नहीं हुई।

प्रशासनिक चूक पर भी उठाए सवाल

भूपेश बघेल ने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा झीरम घटना को बड़ी प्रशासनिक चूक बताए जाने की बात सामने आई थी। उन्होंने सवाल किया कि NIA की जांच में इस चूक के लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय हुई या नहीं।

उन्होंने पूछा कि क्या किसी पुलिस अधिकारी, थानेदार, DSP, IG या अन्य वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ जिम्मेदारी तय की गई? बघेल के मुताबिक, यदि प्रशासनिक स्तर पर हुई कथित चूक की जांच नहीं हुई तो पूरी जांच को पारदर्शी और पूर्ण कैसे माना जा सकता है।

SIT जांच बहाल करने की मांग

बघेल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित SIT की जांच को भाजपा सरकार ने रोक दिया। उन्होंने कहा कि यदि षड्यंत्र की जांच की जाती तो घटना के समय तैनात पुलिस अधिकारियों से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और तत्कालीन मुख्यमंत्री तक से पूछताछ की जा सकती थी।

उन्होंने सरकार से मांग की कि रोकी गई SIT जांच को बहाल किया जाए और घटना से जुड़े सभी संभावित पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

CM साय का पलटवार- ‘सबूत थे तो NIA को क्यों नहीं दिए?’

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता पहले झीरम कांड से जुड़े सबूत अपनी जेब में होने की बात कहते थे। यदि उनके पास कोई ठोस सबूत थे तो उन्हें जांच एजेंसी के सामने पेश करना चाहिए था।

सीएम साय ने कहा कि NIA की जांच और अदालत के फैसले पर सवाल उठाने के बजाय कांग्रेस को न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत ने बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया है।

विजय शर्मा बोले- ‘सबूत है तो जांच एजेंसी को सौंपें’

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि NIA की जांच सही नहीं होती तो अदालत में दोषसिद्धि कैसे होती। उन्होंने कहा कि 25 मई 2013 को झीरम घाटी में नक्सली हमला हुआ था और 27 मई 2013 को मामले की जांच NIA को सौंपी गई थी।

विजय शर्मा ने कहा कि उस समय केंद्र में UPA की सरकार थी। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद मामले में गिरफ्तारियां हुईं और अब NIA की जांच के बाद अदालत ने फैसला सुनाया है।

उन्होंने कहा कि मामले में अभी आगे की जांच और कार्रवाई के पहलू बाकी हो सकते हैं। जिसके पास भी कोई सबूत है, उसे जांच एजेंसी के सामने प्रस्तुत करना चाहिए।

क्या हुआ था झीरम घाटी में?

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर जा रहा था। काफिले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद थे।

झीरम घाटी पहुंचने के दौरान नक्सलियों ने रास्ता रोककर काफिले पर हमला कर दिया। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत कई लोगों की मौत हुई थी। हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे।

इस हमले को छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े नक्सली हमलों में गिना जाता है।

13 साल बाद NIA कोर्ट का फैसला

झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया। मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई हुई थी, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।

अदालत ने शेष 10 आरोपियों को सभी धाराओं में दोषी माना। आरोपियों को 27 लोगों की हत्या और 15 लोगों की हत्या के प्रयास से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया गया है। अदालत द्वारा दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाया जाना है।

ये 10 आरोपी दोषी करार

  1. प्रमिला मोडियम
  2. चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
  3. सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
  4. मुक्का मांडवी
  5. कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
  6. आयता मरकाम
  7. मदकामी देवा
  8. जोगा मदकामी
  9. बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
  10. महादेव नाग

इस तरह झीरम घाटी हमले के करीब 13 साल बाद NIA की विशेष अदालत के फैसले ने मामले को लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज कर दी है। एक ओर विपक्ष कथित साजिश और प्रशासनिक चूक की जांच की मांग कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष उपलब्ध सबूतों के आधार पर न्यायालय के फैसले को महत्वपूर्ण बता रहा है।