July 30, 2026

भीषण गर्मी के बीच खुल रहे स्कूल, अभिभावकों और शिक्षाविदों ने उठाए सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भीषण गर्मी और लू के प्रकोप के बीच 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र के लिए स्कूल खुल रहे हैं। प्रदेश के कई जिलों में तापमान अब भी 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। ऐसे में अभिभावकों, शिक्षाविदों और स्कूल संगठनों ने स्कूल खोलने के फैसले पर चिंता जताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।

स्वास्थ्य विभाग की लू नियंत्रण एडवाइजरी में छोटे बच्चों को दोपहर के समय घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह दी गई है। इसके बावजूद स्कूल खुलने से बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी

अभिभावकों का कहना है कि प्रदेश के अनेक सरकारी स्कूलों में अभी भी बिजली, पंखे और पर्याप्त पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है, जिससे विद्यार्थियों को गर्मी में अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पालकों का सवाल है कि जब घरों में कूलर और एयर कंडीशनर भी तेज गर्मी के आगे प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं, तो बिना पर्याप्त सुविधाओं वाले स्कूलों में छोटे बच्चे पूरे समय कैसे पढ़ाई कर पाएंगे।

पैरेंट्स एसोसिएशन ने जताई आपत्ति

पैरेंट्स एसोसिएशन ने सरकार के स्कूल खोलने के निर्णय का विरोध करते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संगठन का कहना है कि यदि गर्मी के कारण किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

अभिभावकों ने सरकार से मौसम की परिस्थितियों और स्कूलों की तैयारियों की समीक्षा करने की मांग की है।

शिक्षाविदों और निजी स्कूल संगठनों की चिंता

शिक्षाविदों का मानना है कि स्कूल खोलने से पहले सभी शिक्षण संस्थानों में बिजली, पंखे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

एक शिक्षाविद् ने कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके बाद ही नियमित कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाना चाहिए।

वहीं निजी स्कूल संगठन के प्रतिनिधियों ने भी मौसम की गंभीरता को देखते हुए सरकार से आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की अपील की है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बरतने को कहा सावधानी

स्वास्थ्य विभाग की एडवाइजरी के अनुसार छोटे बच्चे लू और हीट स्ट्रोक के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि वर्तमान मौसम में बच्चों को लंबे समय तक धूप और गर्म वातावरण में रहने से बचाना चाहिए।

डॉक्टरों के मुताबिक अभी भी अस्पतालों में लू से प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं। ऐसे में बच्चों का गर्मी में सफर करना और अपर्याप्त सुविधाओं वाले स्कूलों में लंबे समय तक रहना स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।

फैसले पर उठ रहे सवाल

स्कूल खुलने से पहले अभिभावक और विभिन्न संगठनों ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि क्या सभी स्कूलों में बिजली, पंखे और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही उन्होंने लू की स्थिति को देखते हुए स्कूल संचालन की व्यवस्था और सुरक्षा उपायों की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

फिलहाल 16 जून से स्कूल खुलने जा रहे हैं, लेकिन भीषण गर्मी के बीच विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बहस तेज हो गई है।