रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय में अकादमिक गुणवत्ता, शोध, विकास और विद्यार्थियों के शैक्षणिक उन्नयन पर जोर दिया। राज्यपाल ने AI एवं मीडिया रिसर्च सेंटर तथा नवपरिवर्तित सावित्रीबाई फुले कन्या छात्रावास का शुभारंभ किया।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और उनसे जुड़े अपने अनुभव एवं प्रेरणादायी प्रसंग भी साझा किए।
छात्राओं को मिलेगा लाभ
राज्यपाल डेका ने कहा कि नारी शिक्षा, उत्थान और सशक्तिकरण की प्रेरणास्रोत सावित्रीबाई फुले की स्मृति में कन्या छात्रावास का नामकरण किया गया है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से छत्तीसगढ़ के सुदूर अंचलों से आने वाली छात्राओं को मीडिया शिक्षा हासिल करने में मदद मिलेगी।
AI और मीडिया रिसर्च सेंटर का शुभारंभ
सूचना-संचार प्रौद्योगिकी के तेजी से बदलते दौर में मीडिया रिसर्च को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के उद्देश्य से मधुकर खेर मल्टीमीडिया भवन में AI एवं मीडिया रिसर्च सेंटर की शुरुआत की गई।
सूचना प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष एवं एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शैलेन्द्र खण्डेलवाल ने राज्यपाल को केंद्र की अकादमिक और शोध गतिविधियों की जानकारी दी।
एडमिशन में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी
विश्वविद्यालय के कॉन्फ्रेंस कक्ष में राज्यपाल का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. डॉ. मनोज दयाल ने बताया कि पिछले अकादमिक सत्र की तुलना में इस वर्ष विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय न्यूनतम संसाधनों में अधिकतम परिवर्तन के मंत्र “Transformation Without Transaction” पर काम कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के तीन संकल्प बताए—हर छात्र हुनरमंद होगा, हर छात्र संस्कारयुक्त होगा और विश्वविद्यालय की हर गतिविधि में “राष्ट्र प्रथम” की भावना रहेगी।
‘सत्य को सामने लाना पत्रकारिता का दायित्व’
मीडिया विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद के दौरान राज्यपाल डेका ने कहा कि पत्रकारिता के छात्रों के कंधों पर समाज के सामने सत्य को उजागर करने की जिम्मेदारी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उन्हें पत्रकारिता को प्रभावित करने वाली शक्तियों, TRP और विज्ञापन के दबाव के साथ-साथ छोटी-बड़ी पेशेवर गलतियों का भी अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली अपुष्ट और नकारात्मक खबरों के बीच मीडिया की जवाबदेही को महत्वपूर्ण बताया।
राज्यपाल ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, AI और सोशल मीडिया के दौर में भी प्रिंट मीडिया समाज में एक विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है।
फ्रीडम ऑफ स्पीच के साथ ‘सेल्फ सेंसर’ जरूरी
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि समाज में मूल्यों और आदर्शों में कमी के दौर में पत्रकारिता में फ्रीडम ऑफ स्पीच के मानकों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार और सजग पत्रकार के रूप में विद्यार्थियों को जरूरत पड़ने पर सेल्फ सेंसर का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने छत्तीसगढ़ के पत्रकारिता इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1900 में पंडित माधवराव सप्रे ने ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ का प्रकाशन किया था। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि चुनौतीपूर्ण मीडिया प्रोफेशन में उनका लक्ष्य जनता और समाज से जुड़े सत्य को सामने लाना होना चाहिए।
‘अनसंग हीरोज’ की कहानियां सामने लाएं
राज्यपाल ने असम के एक पत्रकार का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से समाज के ‘अनसंग हीरोज’ की कहानियां सामने लाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल घटनाओं की रिपोर्टिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों की कहानियों को भी सामने लाना जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान कुलपति मनोज दयाल ने राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशुतोष मंडावी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा ने किया।
इस अवसर पर लोक भवन के अधिकारी, विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय ग्रंथालय में ‘नारायणी बहुभाषी समाचार पत्र संग्रहालय’ की विभिन्न भाषाओं की पत्र-पत्रिकाओं का प्रदर्शन भी किया गया।




