रायगढ़। जिले के वन क्षेत्रों में खैर और तेंदू प्रजाति की लकड़ियों की अवैध कटाई और अंतरराज्यीय तस्करी करने वाले एक बड़े सिंडिकेट का पुलिस और वन विभाग ने भंडाफोड़ किया है। मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया जा रहा है।
पुलिस के अनुसार, धरमजयगढ़, घरघोड़ा और तमनार वन परिक्षेत्र में ग्रामीणों को पैसों का लालच देकर पेड़ों की अवैध कटाई कराई जाती थी। इसके बाद लकड़ियों को रायगढ़ के गढ़उमरिया स्थित गोदाम में जमा कर अन्य राज्यों में भेजने की तैयारी की जाती थी।

फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट से की जा रही थी तस्करी
जांच में सामने आया कि आरोपियों द्वारा लकड़ियों की अवैध तस्करी को वैध दिखाने के लिए कथित तौर पर फर्जी ट्रांसपोर्ट परमिट का सहारा लिया जा रहा था। लकड़ियों को हरियाणा, हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में अधिक कीमत पर खपाने की तैयारी की जा रही थी।
इस मामले में वन विभाग रायगढ़ और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के बाद तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
गोदाम में छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में लकड़ी जब्त
जानकारी के मुताबिक, वन विभाग ने 5 मई 2025 को गढ़उमरिया स्थित एक गोदाम में छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान ट्रक में लदे 42 नग तेंदू प्रजाति के लट्ठे, गोदाम में रखे खैर और तेंदू प्रजाति के 146 नग लट्ठे, जलाऊ लकड़ी, वजन मशीन, कुल्हाड़ी, हथौड़ा और कटर मशीन जब्त की गई थी।
जांच के दौरान ट्रांसपोर्ट परमिट में जारीकर्ता वन परिक्षेत्र अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जिसके बाद दस्तावेजों के फर्जी होने की आशंका गहराई।
तीन आरोपी गिरफ्तार, एक फरार
मामले में पुलिस ने विशेष टीम गठित कर जांच की। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद रोहित मित्तल, मनीष अग्रवाल और सलाउद्दीन खान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
वहीं, इस कथित सिंडिकेट से जुड़े वाहन मालिक भरत कुमार मेश्राम की तलाश जारी है। पुलिस और वन विभाग पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज
आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, संगठित अपराध और भारतीय वन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और जांच में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।





