डोंगरगढ़। 55 करोड़ रुपये की बहुचर्चित परिक्रमा पथ फोरलेन परियोजना अब विकास कार्य से आगे बढ़कर पारदर्शिता, भूमि चयन और सरकारी संसाधनों के उपयोग को लेकर विवादों में घिर गई है। परियोजना के खिलाफ प्रभावित किसानों ने गंभीर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की है।
किसान फहीम अख्तर समेत कई भू-स्वामियों का आरोप है कि उन्होंने निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उन पर स्पष्ट और कारणयुक्त निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया। मामला अब कलेक्टर कार्यालय से आगे बढ़कर दुर्ग संभाग आयुक्त तक पहुंच गया है, जहां उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
किसानों का कहना है कि प्रशासन खुद स्वीकार कर चुका है कि प्रस्तावित 8 किलोमीटर मार्ग में लगभग 4.475 किलोमीटर हिस्सा शासकीय भूमि पर बनाया जाएगा, जबकि शेष हिस्से के लिए निजी भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सरकारी भूमि उपलब्ध है तो निजी जमीनों का चयन क्यों किया गया और वैकल्पिक मार्गों की तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।
प्रभावित पक्षों का आरोप है कि उन्हें परियोजना का स्वीकृत नक्शा, अंतिम अलाइनमेंट, तकनीकी प्रतिवेदन और भूमि चयन का आधार उपलब्ध नहीं कराया गया। इसी वजह से परियोजना की प्रक्रिया को लेकर संदेह और विरोध लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि अब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायिक मंच ने भ्रष्टाचार, भू-माफिया की संलिप्तता या अनियमितता की पुष्टि नहीं की है, लेकिन किसानों द्वारा लगातार उठाए जा रहे सवालों और प्रशासन की चुप्पी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
किसानों का कहना है कि यदि परियोजना पूरी तरह जनहित में है तो डीपीआर, अंतिम रूट मैप, वैकल्पिक मार्गों के अध्ययन और भूमि चयन के तकनीकी आधार सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि पारदर्शिता से ही विवाद खत्म हो सकता है।
फिलहाल प्रशासन परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है, जबकि प्रभावित किसान इसे जांच का विषय मान रहे हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।




