May 28, 2026

खैरागढ़ में गरीबों के ठेले हटे, मगर सरकारी जमीन की अवैध प्लाटिंग पर 8 महीने से कार्रवाई ठंडे बस्ते में

खैरागढ़। शहर में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर बड़ा विरोधाभास सामने आया है। एक ओर न्यायालय परिसर के सामने सड़क किनारे वर्षों से रोजी-रोटी चला रहे छोटे ठेले और खोमचे हटाने की कार्रवाई की गई, वहीं उसी परिसर के सामने सरकारी जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग और कब्जों पर आठ महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। इस मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और कार्रवाई की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला एडवर्ड पार्क के सामने न्यायालय से लगी नजूल भूमि का है। तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी की संयुक्त जांच में सामने आया कि नजूल प्लॉट नंबर 114 और 115, मूल खसरा नंबर 169 की सरकारी जमीन को बिना वैधानिक अनुमति 22 हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों को बेच दिया गया। जांच दस्तावेजों के अनुसार वर्तमान में इस जमीन पर 17 कब्जाधारी मौजूद हैं और कई हिस्सों में पक्के निर्माण भी कर लिए गए हैं।

राजस्व अभिलेखों में खसरा नंबर 169 का कुल रकबा 2.259 हेक्टेयर दर्ज है और इसकी भूमि प्रकृति “छोटे झाड़ का जंगल एवं घास भूमि” बताई गई है। नियमानुसार ऐसी भूमि का निजी उपयोग, प्लाटिंग या विक्रय नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद करीब 85 हजार वर्गफीट सरकारी जमीन की रजिस्ट्रियां अलग-अलग लोगों के नाम किए जाने का मामला सामने आया है।

नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने भी अपनी जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि का कोई वैध ले-आउट स्वीकृत नहीं किया गया था और पूरी प्रक्रिया अवैध प्लाटिंग की श्रेणी में आती है। इसके बाद 29 सितंबर 2025 को कलेक्टर कार्यालय ने नगर पालिका परिषद को नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन आठ महीने बीतने के बाद भी न अवैध निर्माण हटाए गए और न ही जिम्मेदार लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई हुई।

वहीं हाल ही में मुख्य मार्ग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान छोटे दुकानदारों और ठेला संचालकों में भय का माहौल बन गया। पालिका कर्मचारी और पुलिस बल मौके पर मौजूद रहे, लेकिन नगर पालिका और राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचे। अंत में केवल दो ठेले जब्त कर औपचारिक कार्रवाई की गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीबों और छोटे कारोबारियों पर तुरंत कार्रवाई होती है, जबकि सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और करोड़ों की प्लाटिंग करने वालों पर प्रशासन नरमी बरत रहा है। मामले में उप पंजीयक कार्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति के बिना रजिस्ट्रियां की गईं, जबकि संबंधित विभाग पहले ही प्लाटिंग को अवैध घोषित कर चुके हैं।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय एसआईटी जांच, सभी 22 रजिस्ट्रियों को निरस्त करने, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच और भू-माफियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

नगर पालिका परिषद के सीएमओ पुनीत राम वर्मा ने कहा कि उन्होंने दो महीने पहले ही पदभार संभाला है और पूरी फाइल का परीक्षण करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट कर पाएंगे। वहीं नजूल अधिकारी रेणुका रात्रे ने बताया कि अवैध प्लाटिंग की पुष्टि होने के बाद नगर पालिका को कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।