June 3, 2026

10 सूत्रीय मांगों पर उबाल: कोयलीबेड़ा में चक्काजाम, बालोद में आदिवासी समाज ने घेरा कलेक्ट्रेट

भानुप्रतापपुर/बालोद। छत्तीसगढ़ में विभिन्न मांगों को लेकर दो अलग-अलग जिलों में बड़े विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा में ग्रामीणों ने 10 सूत्रीय मांगों को लेकर चक्काजाम कर दिया, वहीं बालोद में आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया।

कोयलीबेड़ा में 18 पंचायतों के ग्रामीणों का चक्काजाम

कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा क्षेत्र में 18 पंचायतों के 68 गांवों के ग्रामीण पिछले छह दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। मंगलवार को आंदोलन के सातवें दिन मांगें पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने अंतागढ़ में चक्काजाम कर दिया।

चक्काजाम के चलते भानुप्रतापपुर-नारायणपुर मार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आंदोलनरत ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों, विशेषकर सांसद और विधायक के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में जिला सहकारी बैंक की स्थापना, ब्लॉक मुख्यालय को पखांजूर से वापस कोयलीबेड़ा लाना, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला डॉक्टर की नियुक्ति, उत्कृष्ट विद्यालय की स्थापना, डीएमएफ राशि का स्थानीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत उपयोग, जर्जर स्कूल-आश्रमों की मरम्मत, कॉलेज की स्थापना, खाद-बीज की पर्याप्त उपलब्धता, अंतागढ़-कोयलीबेड़ा सड़क का डामरीकरण तथा तहसील को अंतागढ़ अनुभाग से जोड़ने की मांग शामिल है।

बालोद में आदिवासी समाज का कलेक्ट्रेट घेराव

इधर बालोद जिले में पाटेश्वर धाम से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आदिवासी समाज के हजारों लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारी पुलिस बैरिकेड्स पार कर कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शनकारियों ने परिसर में ही भोजन बनाकर आंदोलन जारी रखा। आदिवासी समाज का आरोप है कि पाटेश्वर धाम से जुड़े बालक दास के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई है।

समाज के प्रतिनिधियों ने 12 एकड़ से अधिक भूमि पर कथित अवैध कब्जा हटाने, पंचायत प्रस्ताव के बिना कराए गए निर्माण कार्यों की जांच, जलकैनी माता स्थल को हुए नुकसान की जांच तथा ग्राम सभा की अनुमति के बिना जल, जंगल और जमीन पर किए गए कब्जे और निर्माण कार्यों पर कार्रवाई की मांग की है।

इसके साथ ही 17 मई से 15 जून 2026 तक प्रस्तावित मेला आयोजन पर प्रतिबंध लगाने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी गई है।

दोनों जिलों में चल रहे आंदोलनों के चलते प्रशासनिक अमला सतर्क है और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर चर्चा तथा समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।