July 21, 2026

Khairagarh News: अंतरजातीय विवाह पर सामाजिक बहिष्कार का आरोप, वकील दंपती ने FIR की मांग की

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में अंतरजातीय विवाह को लेकर सामाजिक बहिष्कार और कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। अधिवक्ता नेमीचंद वर्मा और उनकी पत्नी प्रमिला सोनकर ने समाज के कुछ पदाधिकारियों पर 35 हजार रुपये की अवैध वसूली, सामाजिक बहिष्कार, जबरन सामूहिक भोज कराने और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

शिकायत के अनुसार, नेमीचंद वर्मा ने सितंबर 2025 में अपनी इच्छा से प्रमिला सोनकर के साथ विधिसम्मत अंतरजातीय विवाह किया था। इसके बाद गांव में समाज की बैठक बुलाकर कथित रूप से उनके परिवार पर 35 हजार रुपये का सामाजिक जुर्माना लगाया गया। शिकायत में दावा किया गया है कि आर्थिक दबाव के चलते परिवार ने यह राशि जमा कर दी।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद भी उनसे पूरे समाज के लिए सामूहिक भोज कराने और समाज की आराध्य वीरांगना अवंतीबाई लोधी की प्रतिमा के समक्ष पूजा-अर्चना करने के लिए कहा गया। परिवार ने यह शर्तें भी पूरी कीं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समाज में दोबारा शामिल नहीं किया गया।

दंपती का आरोप है कि समाज के लोगों को उनके परिवार से किसी भी प्रकार का सामाजिक संबंध न रखने, शादी-ब्याह, धार्मिक कार्यक्रम और अन्य आयोजनों में न बुलाने तथा उनके घर न जाने के निर्देश दिए गए। उनका कहना है कि इस कारण उन्हें लंबे समय से सामाजिक अपमान, मानसिक तनाव और अलगाव का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया है कि उनके पास कथित घटनाओं से जुड़ी ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें सामाजिक बहिष्कार और कथित वसूली का उल्लेख होने का दावा किया गया है। उन्होंने रिकॉर्डिंग और मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच कराने के लिए पुलिस को सौंपने की सहमति भी दी है।

आवेदन में सुकरीत वर्मा, कोदू वर्मा, समय लाल वर्मा, जैत वर्मा और चंद्रबहादुर वर्मा को आरोपी बनाया गया है। दंपती ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर दर्ज करने, कथित रूप से वसूले गए 35 हजार रुपये वापस दिलाने, ऑडियो रिकॉर्डिंग की जांच कराने और समाज के नाम पर कथित समानांतर व्यवस्था की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल यह मामला पुलिस अधीक्षक को दिए गए शिकायत आवेदन पर आधारित है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता और आगे की कानूनी कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।